देश की हाईस्पीड ट्रेनों में शामिल वंदे भारत एक्सप्रेस की सुरक्षा को लेकर अब बड़ा और सख्त कदम उठाया गया है। हाल ही में हुई पथराव की घटना के बाद रेलवे प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से नए स्तर पर पहुंचाने का फैसला किया है। बताया जा रहा है कि जब 24 घंटे पहले इसी ट्रेन से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख यात्रा कर रहे थे, तब ट्रेन पर कुछ असामाजिक तत्वों ने पथराव कर दिया था। इस घटना ने रेलवे सुरक्षा तंत्र को अलर्ट कर दिया।
अब वंदे भारत एक्सप्रेस संख्या 22549-50 के गुजरने के दौरान हर एक किलोमीटर की परिधि में जवानों की तैनाती अनिवार्य कर दी गई है। रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) और राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) को इस संबंध में विशेष निर्देश जारी किए गए हैं। संवेदनशील स्थानों, पुलों, रेलवे क्रॉसिंग और आउटर एरिया में अतिरिक्त फोर्स लगाई जाएगी ताकि किसी भी अप्रिय घटना को पहले ही रोका जा सके।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह व्यवस्था फिलहाल एहतियातन लागू की गई है, लेकिन जरूरत पड़ने पर इसे स्थायी रूप दिया जा सकता है। सुरक्षा एजेंसियां किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतना चाहतीं।
‘सेल्फी प्रूफ’ से होगी निगरानी की पुष्टि
इस नई व्यवस्था की सबसे खास और चौंकाने वाली बात यह है कि अब ड्यूटी पर तैनात जवानों को ट्रेन के गुजरते समय अपनी एक सेल्फी लेकर उच्चाधिकारियों द्वारा बनाए गए व्हाट्सएप ग्रुप में साझा करनी होगी। यह सेल्फी इस बात का प्रमाण मानी जाएगी कि संबंधित जवान अपनी ड्यूटी प्वाइंट पर मौजूद था और ट्रेन के गुजरते समय सतर्क था।
जीआरपी थानाध्यक्ष सचिन कुमार ने बताया कि एसपी रोहित मिश्र के निर्देश पर शुक्रवार से यह नियम लागू कर दिया गया है। उन्होंने साफ कहा कि यह कदम केवल निगरानी को मजबूत करने के लिए उठाया गया है, ताकि हर प्वाइंट पर वास्तविक समय में उपस्थिति की पुष्टि हो सके। पहले केवल मौखिक रिपोर्ट या वायरलेस संदेश के जरिए जानकारी दी जाती थी, लेकिन अब डिजिटल प्रमाण भी अनिवार्य कर दिया गया है।
अधिकारियों का मानना है कि व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए तुरंत फोटो साझा होने से कंट्रोल रूम में बैठे वरिष्ठ अधिकारी हर प्वाइंट की स्थिति को देख सकेंगे। इससे पारदर्शिता भी बढ़ेगी और जिम्मेदारी तय करना भी आसान होगा।
सीसीटीवी और अतिरिक्त फोर्स की तैयारी
रेलवे प्रशासन केवल जवानों की तैनाती तक सीमित नहीं रहना चाहता। जिन स्थानों को ज्यादा संवेदनशील माना गया है, वहां जल्द ही सीसीटीवी कैमरे लगाने की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक कुछ महत्वपूर्ण पुलों और आउटर क्षेत्रों में कैमरे लगाने का प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है।
जीआरपी के अधिकारियों ने यह भी स्वीकार किया है कि इस नई व्यवस्था को लागू करने के लिए अतिरिक्त फोर्स की जरूरत पड़ेगी। हर किलोमीटर पर जवान तैनात करना आसान नहीं है, इसलिए उच्च स्तर पर और बल की मांग की जाएगी। यदि जरूरत पड़ी तो अस्थायी तौर पर अन्य जिलों से भी फोर्स बुलाई जा सकती है।
रेलवे सुरक्षा बल के एक अधिकारी ने बताया कि वंदे भारत जैसी प्रीमियम ट्रेनों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। यात्रियों की सुरक्षा के साथ-साथ ट्रेन की संरचना और संपत्ति की रक्षा भी उतनी ही जरूरी है। पथराव की घटनाएं न केवल यात्रियों को खतरे में डालती हैं बल्कि रेलवे की छवि को भी नुकसान पहुंचाती हैं।
सुरक्षा बनाम व्यवहारिकता, उठ रहे सवाल भी
जहां एक ओर इस सख्त व्यवस्था की सराहना की जा रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग इसे व्यवहारिकता के नजरिए से भी देख रहे हैं। हर किलोमीटर पर जवान की तैनाती और ट्रेन गुजरते समय सेल्फी लेना — यह व्यवस्था कितने समय तक सुचारू रूप से चल पाएगी, इस पर चर्चा शुरू हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल निगरानी एक अच्छा कदम है, लेकिन इसके साथ तकनीकी ढांचे को और मजबूत करना होगा। नेटवर्क की समस्या वाले इलाकों में व्हाट्सएप पर तुरंत फोटो भेजना चुनौती हो सकता है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि जहां नेटवर्क कमजोर है, वहां वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी।
फिलहाल रेलवे प्रशासन किसी भी जोखिम को लेने के मूड में नहीं है। वंदे भारत एक्सप्रेस देश की आधुनिक ट्रेन सेवाओं का प्रतीक बन चुकी है, और उसकी सुरक्षा में किसी तरह की चूक बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि ‘सेल्फी सुरक्षा मॉडल’ कितनी प्रभावी साबित होता है और क्या इसे अन्य ट्रेनों पर भी लागू किया जाता है।
