उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों चरखारी से भारतीय जनता पार्टी के विधायक बृजभूषण राजपूत का नाम तेजी से सुर्खियों में है। वजह है उनका बेबाक और कई लोगों की नजर में बड़बोला अंदाज। हाल ही में महोबा जिले में हर घर नल योजना के तहत हो रहे काम को लेकर उन्होंने राज्य सरकार के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह का काफिला रोक दिया था। विधायक का आरोप था कि योजना के नाम पर गांवों की सड़कें पूरी तरह से खराब कर दी गई हैं और अधिकारियों ने समय रहते कोई ठोस व्यवस्था नहीं की। इसी घटना के बाद से बृजभूषण राजपूत लगातार चर्चा में हैं। अब उनका एक और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वह न सिर्फ सरकार के कामकाज पर सवाल उठा रहे हैं, बल्कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर भी बड़ा बयान देते नजर आ रहे हैं। इस बयान ने बीजेपी के अंदर और बाहर दोनों जगह हलचल बढ़ा दी है।
‘अकेले में क्यों बात करूं’, सार्वजनिक मंच से सवाल उठाने की दलील
वायरल वीडियो में विधायक बृजभूषण राजपूत यह कहते हुए दिख रहे हैं कि उन्हें अपनी बात बंद कमरे में करने की कोई जरूरत नहीं है। उनके मुताबिक, जब मुद्दा जनता और विकास से जुड़ा है तो उसे खुले मंच और सड़क पर उठाने में क्या गलत है। उन्होंने कहा कि अगर वह सड़क पर खड़े होकर अपनी बात रखते हैं तो इससे किसी को परेशानी नहीं होनी चाहिए। विधायक ने साफ शब्दों में कहा कि वह न तो किसी ठेके की मांग कर रहे हैं और न ही किसी पदोन्नति की। उनका दावा है कि वह केवल अपने क्षेत्र की जनता की समस्याएं उठा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनका यह रूप एक जनप्रतिनिधि का है, जो जनता के बीच रहकर सवाल पूछता है। इस बयान के जरिए विधायक ने यह संदेश देने की कोशिश की कि वह सत्ता के दबाव में चुप रहने वालों में से नहीं हैं।
अधिकार सेना से बीजेपी तक, पुराने तेवरों का जिक्र
अपने बयान में बृजभूषण राजपूत ने अपने राजनीतिक अतीत का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बीजेपी में शामिल होने से पहले बुंदेलखंड अधिकार सेना से जुड़े रहे हैं और उस दौर में उनका तरीका काफी सख्त हुआ करता था। विधायक ने यहां तक कह दिया कि पहले जो अधिकारी काम नहीं करता था, उसे चूड़ियां और पेटीकोट पहनवा दी जाती थी। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि बीजेपी में आने के बाद वह पार्टी अनुशासन में रहते हैं। फिर भी उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। कई लोग इसे प्रशासन और राजनीति की मर्यादा के खिलाफ मान रहे हैं, जबकि उनके समर्थक इसे एक दबंग नेता की ईमानदार आवाज बता रहे हैं। यह भी साफ है कि विधायक अपने बयानों से यह दिखाना चाहते हैं कि वह किसी से डरते नहीं हैं और जरूरत पड़ी तो किसी भी स्तर पर सवाल उठा सकते हैं।
‘जरूरत पड़ी तो मुख्यमंत्री को भी रोकेंगे’, बयान से बढ़ी सियासी हलचल
सबसे ज्यादा चर्चा विधायक के उस बयान की हो रही है, जिसमें उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो मुख्यमंत्री को भी रोकेंगे। इस एक लाइन ने यूपी की राजनीति में भूचाल ला दिया है। बीजेपी जैसी अनुशासित पार्टी में इस तरह का बयान असहज माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह बयान पार्टी नेतृत्व के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है, क्योंकि विपक्ष इसे बीजेपी के अंदरूनी मतभेद के तौर पर पेश कर सकता है। वहीं समर्थकों का तर्क है कि विधायक का इरादा टकराव नहीं बल्कि जनता की आवाज को ऊपर तक पहुंचाना है। फिलहाल यह साफ नहीं है कि पार्टी नेतृत्व इस पूरे मामले पर क्या रुख अपनाएगा, लेकिन इतना तय है कि बृजभूषण राजपूत के बयान ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी कभी भी बड़ा मुद्दा बन सकती है।
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