प्रयागराज के माघ मेला क्षेत्र में इस बार अगर किसी एक चेहरे की सबसे ज्यादा चर्चा है, तो वह सतुआ पीठ के पीठाधीश्वर सतुआ बाबा हैं। न तो वे किसी फिल्मी दुनिया से जुड़े हैं और न ही किसी राजनीतिक पद पर हैं, फिर भी सोशल मीडिया से लेकर संत समाज और सियासी गलियारों तक उनका नाम गूंज रहा है। कभी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ तस्वीरों में नजर आना, कभी सांसद और अभिनेता रवि किशन के साथ हंसी-मजाक, और कभी लग्जरी डिफेंडर गाड़ी से उतरते वीडियो—इन सबने सतुआ बाबा को अचानक चर्चा के केंद्र में ला दिया। माघ मेला क्षेत्र में मौजूद श्रद्धालु हों या सोशल मीडिया यूजर्स, हर कोई यही जानना चाहता है कि आखिर सतुआ बाबा हैं कौन और उनका जीवन दर्शन क्या है। इसी जिज्ञासा के बीच सतुआ बाबा ने मीडिया से बातचीत कर खुद सामने आकर हर सवाल का जवाब दिया और स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य न प्रचार है, न विवाद, बल्कि सनातन को जोड़ने का संदेश देना है।
योगी आदित्यनाथ से रिश्ते और संत समाज की सोच
सतुआ बाबा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपनी नजदीकियों को लेकर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ सिर्फ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री नहीं हैं, बल्कि गोरक्ष पीठ के पीठाधीश्वर और संत समाज के गौरव हैं। उनके साथ बैठने या मिलने को राजनीतिक चश्मे से देखना गलत है। बाबा के अनुसार, योगी आदित्यनाथ का व्यवहार केवल इंसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि पशु, पक्षी, जल और प्रकृति तक फैला हुआ है। यही कारण है कि आम जनमानस से लेकर संत समाज तक उनके प्रति सम्मान का भाव है। सतुआ बाबा का कहना है कि संत और सत्ता का रिश्ता सेवा के माध्यम से होता है, न कि स्वार्थ से। उन्होंने यह भी कहा कि सनातन परंपरा हमेशा से समाज को जोड़ने वाली रही है। यहां पद या सत्ता नहीं, बल्कि उद्देश्य बड़ा होता है। उनका मानना है कि जब समाज में सकारात्मक ऊर्जा फैलती है, तो उसका असर अपने आप दिखाई देता है।
डिफेंडर और लग्जरी गाड़ियों पर साफ जवाब
सबसे ज्यादा चर्चा सतुआ बाबा के उन वीडियो को लेकर है, जिनमें वह डिफेंडर जैसी महंगी गाड़ी से उतरते नजर आते हैं। इस सवाल पर बाबा का जवाब बेहद सादा लेकिन स्पष्ट रहा। उन्होंने कहा, “हमें न गाड़ी की कंपनी मालूम है, न उसकी कीमत। हमें बस अपने लक्ष्य तक पहुंचना होता है।” बाबा के अनुसार, साधन कभी भी साध्य से बड़ा नहीं होता। गाड़ी, वस्त्र या व्यवस्था सिर्फ माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि अगर पुराने समय में इसे रथ कहा जाता था, तो आज गाड़ी कह दीजिए। सनातन परंपरा हमेशा से वैभवशाली रही है और इसमें कोई संकोच की बात नहीं है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि बाहरी दिखावे से ज्यादा जरूरी आंतरिक साधना होती है। हम कहां से चले और कहां पहुंचना है, यही महत्वपूर्ण है। जहां काम पूरा होता है, वहीं उतर जाते हैं। बाबा के इस बयान के बाद कई लोगों का मानना है कि उन्होंने सादगी और आधुनिक व्यवस्था के बीच संतुलन की बात रखी है।
राजनीति, विवाद और माघ मेले का संदेश
डीएम के साथ रोटी बनाने वाले वायरल वीडियो और उस पर हुई राजनीति पर भी सतुआ बाबा ने दो टूक कहा कि रोटी बनाना या खाना कोई अपराध नहीं है। प्रयागराज सनातन की भूमि है, जहां माघ मेला और कुंभ जैसे आयोजन होते हैं। जिलाधिकारी वहां व्यवस्था संभालते हैं, और अगर वे संतों के साथ बैठते हैं तो इसमें कुछ भी गलत नहीं। बाबा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उदाहरण देते हुए कहा कि भारत की संस्कृति जोड़ने की है, तोड़ने की नहीं। वहीं समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के बयान पर उन्होंने तीखा पलटवार करते हुए कहा कि जो लोग समाज को जाति और वर्ग में बांटते हैं, वही आज सवाल उठा रहे हैं। बाबा ने माघ मेला, मकर संक्रांति और मौनी अमावस्या के महत्व पर भी विस्तार से बात की और कहा कि संगम में स्नान केवल परंपरा नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि का माध्यम है। उनके अनुसार गंगा तब भी पवित्र थी और आज भी है। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था इसका सबसे बड़ा प्रमाण है। सतुआ बाबा का कहना है कि सनातन का रास्ता सेवा, समरसता और साधना का रास्ता है, और वही उनका जीवन लक्ष्य भी है।
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