Wednesday, February 4, 2026
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सीएम योगी के समर्थन में संत समाज, शंकराचार्य से माफी की उठी मांग, परमहंस आचार्य बोले ‘क्षमा मांगे नहीं तो…’

Shankaracharya Avimukteshwaranand विवाद में नया मोड़ आ गया है। तपस्वी छावनी पीठाधीश्वर परमहंस आचार्य ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को सीएम योगी से माफी मांगने की चेतावनी दी और अयोध्या में प्रवेश पर रोक की घोषणा की।

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शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर चल रहा विवाद अब और ज्यादा गंभीर होता दिख रहा है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर की गई टिप्पणी के बाद संत समाज में नाराजगी लगातार बढ़ रही है। इसी कड़ी में अब तपस्वी छावनी पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य खुलकर सामने आ गए हैं। उन्होंने साफ शब्दों में ऐलान किया है कि अगर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगी, तो उन्हें रामनगरी अयोध्या में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। परमहंस आचार्य ने कहा कि अयोध्या सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि सनातन आस्था का केंद्र है और यहां संतों की मर्यादा सर्वोपरि है। उन्होंने आरोप लगाया कि शंकराचार्य की टिप्पणी ने न सिर्फ मुख्यमंत्री का अपमान किया है, बल्कि संत परंपरा की गरिमा को भी ठेस पहुंचाई है।

सीएम योगी पर टिप्पणी को बताया निंदनीय, संत समाज में रोष

परमहंस आचार्य ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा सीएम योगी आदित्यनाथ को औरंगजेब और हुमायूं का बेटा बताए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने इसे बेहद आपत्तिजनक और अस्वीकार्य बताया। परमहंस आचार्य का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था, विकास और सनातन धर्म के संरक्षण के लिए ठोस काम किया है। ऐसे व्यक्ति पर इस तरह की भाषा का प्रयोग करना निंदनीय है। उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ ने रामनगरी अयोध्या को वैश्विक पहचान दिलाई है और प्रदेश को नई दिशा दी है। ऐसे में किसी संत के द्वारा इस प्रकार की टिप्पणी करना संत समाज की परंपराओं के खिलाफ है। परमहंस आचार्य ने स्पष्ट किया कि जब तक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने शब्द वापस नहीं लेते और माफी नहीं मांगते, तब तक उनका अयोध्या आना स्वीकार नहीं किया जाएगा।

गाय आंदोलन पर भी उठे सवाल

परमहंस आचार्य ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के गाय को लेकर चल रहे आंदोलन पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन धार्मिक कम और राजनीतिक ज्यादा नजर आता है। उनका आरोप है कि इस आंदोलन का उद्देश्य विपक्ष को राजनीतिक लाभ पहुंचाना है, न कि वास्तविक रूप से गौ रक्षा करना। परमहंस आचार्य ने कहा कि गाय को राष्ट्र माता घोषित करने की मांग अपनी जगह है, लेकिन इससे जमीनी स्तर पर बछड़ों और बैलों के वध जैसी समस्याएं अपने आप खत्म नहीं हो जाएंगी। इसके लिए व्यावहारिक और संगठित व्यवस्था की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि भगवा वस्त्र पहनकर किसी संत द्वारा इस तरह की भाषा का प्रयोग करना पूरे संत समाज का अपमान है। उन्होंने सभी सनातनियों से अपील की कि जब तक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने बयान पर माफी नहीं मांगते, तब तक उनका सामाजिक और धार्मिक बहिष्कार किया जाए।

सरकार से गौ रक्षा की मांग, पुराने विवादों का भी जिक्र

परमहंस आचार्य ने केंद्र और राज्य सरकारों से मांग की कि गोवंश को राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया जाए और देशभर में पूर्ण रूप से गौ हत्या पर प्रतिबंध लगाया जाए। उन्होंने कहा कि गौ रक्षा की जिम्मेदारी सिर्फ कानून के भरोसे नहीं छोड़ी जा सकती, बल्कि ग्राम स्तर पर मजबूत व्यवस्था बनानी होगी, ताकि गायों की सही देखभाल हो सके। इस पूरे विवाद के बीच अयोध्या के जीएसटी डिप्टी कमिश्नर पंकज सिंह का मामला भी चर्चा में है, जिन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में पहले इस्तीफा दिया था, हालांकि कुछ दिनों बाद उन्होंने अपना इस्तीफा वापस ले लिया। यह पूरा घटनाक्रम बताता है कि शंकराचार्य विवाद अब सिर्फ बयानबाज़ी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका असर प्रशासन, संत समाज और राजनीति तीनों पर साफ दिखने लगा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने रुख में बदलाव करते हैं या यह विवाद और गहराता है।

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