उत्तर प्रदेश के संभल जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। संभल के असमोली क्षेत्र के बदनपुर बसेई गांव की रहने वाली मुस्लिम युवती तमन्ना इन दिनों चर्चा में हैं। वजह है उनका हरिद्वार से कांवड़ लाना। तमन्ना ने बताया कि करीब तीन साल पहले उन्होंने भगवान शिव से एक मन्नत मांगी थी। उन्होंने प्रार्थना की थी कि अगर उनकी शादी अमन त्यागी से हो जाए, तो वह हरिद्वार से कांवड़ लाकर जलाभिषेक करेंगी। समय बीता, परिवार की रजामंदी मिली और उनकी शादी अमन त्यागी से हो गई। अब जब उनका वादा पूरा हो गया, तो तमन्ना ने भी अपनी प्रतिज्ञा निभाने का फैसला किया और कांवड़ यात्रा पर निकल पड़ीं।
हरिद्वार से संभल तक आस्था की यात्रा
तमन्ना 10 फरवरी को Haridwar पहुंचीं और वहां से गंगाजल भरकर कांवड़ उठाई। बुर्का पहने, कंधे पर भगवान शिव के नाम की कांवड़ लेकर जब वह निकलीं तो लोगों की नजरें उन पर ठहर गईं। शिवरात्रि के मौके पर लाखों श्रद्धालु कांवड़ यात्रा करते हैं, लेकिन एक मुस्लिम महिला का इस तरह श्रद्धा के साथ शामिल होना लोगों के लिए खास बन गया। तमन्ना का कहना है कि उनके लिए आस्था सबसे ऊपर है। वह बताती हैं कि उन्होंने भगवान शिव से सच्चे मन से प्रार्थना की थी और उनकी दुआ कबूल हुई। अब वह संभल के प्रसिद्ध Kshemanath Teerth में जल चढ़ाकर अपनी मन्नत पूरी करेंगी। रास्ते में कई शिवभक्त उनके साथ चल रहे हैं और उनका हौसला बढ़ा रहे हैं।
शादी के बाद बदली जिंदगी, दो बेटों की मां बनीं
तमन्ना बताती हैं कि शादी के बाद उनकी जिंदगी खुशहाल है। अमन त्यागी से विवाह के बाद उनके दो बेटे हुए हैं और परिवार में शांति है। वह मानती हैं कि यह सब भोलेनाथ की कृपा से हुआ है। उन्होंने कहा कि जब उनकी मन्नत पूरी हुई तो उन्होंने तय किया कि वह अपना वादा जरूर निभाएंगी। समाज में कई बार धर्म को लेकर बहस होती है, लेकिन तमन्ना का कहना है कि इंसान की नीयत और विश्वास ज्यादा महत्वपूर्ण है। उनका मानना है कि भगवान एक ही हैं, बस उन्हें मानने के तरीके अलग-अलग हो सकते हैं। कांवड़ यात्रा के दौरान उन्हें कई लोगों का समर्थन मिला। कुछ लोग हैरान जरूर हुए, लेकिन ज्यादातर ने उनकी श्रद्धा की सराहना की।
सोशल मीडिया पर वायरल हुई कहानी
तमन्ना की कांवड़ यात्रा के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। लोग उनकी कहानी को अलग नजर से देख रहे हैं। कुछ लोग इसे गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल बता रहे हैं, तो कुछ इसे व्यक्तिगत आस्था का मामला कह रहे हैं। शिवरात्रि के पावन अवसर पर जब वह क्षेमनाथ तीर्थ पर जलाभिषेक करेंगी, तो यह उनके लिए भावनात्मक पल होगा। तमन्ना का कहना है कि उन्होंने जो वादा किया था, उसे निभाना जरूरी था। उनके मुताबिक आस्था किसी धर्म की सीमा में बंधी नहीं होती। संभल से हरिद्वार और फिर वापस जल लेकर लौटती इस यात्रा ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि विश्वास और प्रेम की भावना सबसे बड़ी होती है।
Read More-बांग्लादेश में 17 फरवरी को बदलेगा सियासी नक्शा? तारिक रहमान की शपथ में क्या पहुंचेगे पीएम मोदी
