प्रयागराज में चल रहे माघ मेला से सोमवार को एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई, जिसने श्रद्धालुओं से लेकर प्रशासन तक को कुछ देर के लिए सकते में डाल दिया। गंगा किनारे बसे माघ मेला क्षेत्र में अचानक भीषण आग लग गई, जिससे कई कल्पवासियों के शिविर जलकर खाक हो गए। आग इतनी तेज थी कि उसकी लपटें कई किलोमीटर दूर से साफ दिखाई दे रही थीं। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस हादसे में किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन आग ने मेले की सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
अचानक कैसे लगी आग? मेला क्षेत्र में मचा हड़कंप
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, माघ मेला के सेक्शन-5 स्थित नारायण शुक्ला धाम शिविर से अचानक धुआं उठता दिखा। कुछ ही पलों में आग ने विकराल रूप ले लिया और देखते ही देखते आसपास के कई शिविरों को अपनी चपेट में ले लिया। उस समय शिविरों में रह रहे कल्पवासी दैनिक पूजा-पाठ और अन्य धार्मिक गतिविधियों में व्यस्त थे। आग फैलते ही अफरा-तफरी मच गई और लोग अपने जरूरी सामान को बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए। प्रारंभिक जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है, हालांकि प्रशासन ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
फायर ब्रिगेड और प्रशासन की मुस्तैदी, बड़ा हादसा टला
आग की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की 6 से 7 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और तुरंत आग बुझाने का अभियान शुरू किया गया। पुलिस, स्थानीय प्रशासन, मेला सुरक्षा बल और संतों ने मिलकर बचाव कार्य को तेज किया। आग पर काबू पाने में करीब एक से डेढ़ घंटे का समय लगा। दमकल कर्मियों ने तेजी से फैल रही आग को अन्य सेक्शनों तक पहुंचने से पहले ही रोक लिया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। अधिकारियों के अनुसार, अगर समय रहते आग पर नियंत्रण नहीं पाया जाता, तो नुकसान कहीं ज्यादा बड़ा हो सकता था।
कल्पवासियों का नुकसान और सुरक्षा पर उठे सवाल
इस भीषण आग में कई कल्पवासियों के तंबू, बिस्तर, कपड़े, राशन और पूजा सामग्री पूरी तरह जलकर नष्ट हो गई। वर्षों से कल्पवास कर रहे कुछ श्रद्धालुओं ने बताया कि उन्होंने पहली बार इतनी भयावह स्थिति देखी। हालांकि प्रशासन ने तत्काल राहत और पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू करने का भरोसा दिया है। घटना के बाद माघ मेला क्षेत्र में सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा भी शुरू कर दी गई है। बिजली के अस्थायी कनेक्शन, खुले तार और भारी संख्या में ज्वलनशील सामग्री होने के कारण आग का खतरा हमेशा बना रहता है। ऐसे में यह घटना भविष्य के लिए एक चेतावनी मानी जा रही है।
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