गाजियाबाद के हरीश राणा की अंतिम विदाई का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक महिला हरीश के माथे पर तिलक लगाकर उन्हें शांति और क्षमा का संदेश देती नजर आती हैं। ये महिला हैं सिस्टर लवली, जो ब्रह्माकुमारी संस्था से जुड़ी हैं। वीडियो में उनके शब्द—“सबको माफ करते हुए जाओ”—ने लोगों के दिल को गहराई से छू लिया है और हर कोई यह जानना चाहता है कि इस भावुक पल के पीछे की असली कहानी क्या है।
सिस्टर लवली ने समझाया ‘माफी’ का महत्व
सिस्टर लवली ने बताया कि हरीश का परिवार पिछले कई वर्षों से ब्रह्माकुमारी संस्था से जुड़ा हुआ है। जब सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें इच्छामृत्यु की अनुमति दी, तो परिवार ने आध्यात्मिक मार्गदर्शन के लिए उन्हें बुलाया। सिस्टर लवली के अनुसार, भले ही शरीर और मस्तिष्क का संपर्क टूट जाए, लेकिन आत्मा सब कुछ महसूस करती है। इसलिए अंतिम समय में मन को शांत और बोझमुक्त करना बेहद जरूरी होता है। ‘सबको माफ करने’ का संदेश इसी सोच का हिस्सा है, ताकि आत्मा बिना किसी नकारात्मक भाव के अपनी अगली यात्रा पर जा सके।
13 साल का संघर्ष और एक मां का फैसला
हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से कोमा में थे। इस दौरान उनकी मां ने हर संभव कोशिश की कि उनका बेटा ठीक हो जाए। परिवार ने इलाज के लिए अपनी पूरी जमा-पूंजी तक खर्च कर दी, यहां तक कि अपना घर भी बेच दिया। लेकिन जब लंबे समय तक कोई सुधार नहीं हुआ, तो अंत में परिवार को एक बेहद कठिन फैसला लेना पड़ा। हरीश की मां ने भारी दिल से इच्छामृत्यु के लिए सहमति दी, ताकि उनके बेटे को लगातार हो रही पीड़ा से मुक्ति मिल सके। यह फैसला किसी भी माता-पिता के लिए आसान नहीं होता, लेकिन परिस्थितियों ने उन्हें यह कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।
लोगों से सकारात्मक ऊर्जा भेजने की अपील
सिस्टर लवली ने अंत में लोगों से अपील की है कि वे हरीश की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करें। उनका मानना है कि जब कोई व्यक्ति जीवन के अंतिम पड़ाव पर होता है, तो उसे सबसे ज्यादा जरूरत शांति और सकारात्मक ऊर्जा की होती है। उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रार्थनाएं आत्मा की यात्रा को सरल बना सकती हैं। यह पूरी घटना न केवल एक परिवार के संघर्ष की कहानी है, बल्कि यह भी सिखाती है कि जीवन और मृत्यु के बीच संवेदनशीलता, समझ और करुणा कितनी जरूरी होती है।
