US Iran Talks: पाकिस्तान में अमेरिका और Iran के बीच सीजफायर और शांति समझौते को लेकर हुई लंबी बातचीत बिना किसी निष्कर्ष के समाप्त हो गई। Islamabad में 20 घंटे से ज्यादा चली इस वार्ता से उम्मीद थी कि दोनों देशों के बीच तनाव कम होगा, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने भी माना कि बातचीत गंभीर रही, लेकिन किसी समझौते तक नहीं पहुंचा जा सका। इस असफलता के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है और अब अलग-अलग पक्षों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
खालिद रशीद फिरंगी की अपील
ऑल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य Khalid Rasheed Firangi Mahali ने US Iran Talks पर चिंता जताते हुए कहा कि यह बेहद गंभीर स्थिति है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि United Nations और Organisation of Islamic Cooperation जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठन इस मामले में हस्तक्षेप करें। उनका मानना है कि केवल संवाद और कूटनीतिक प्रयासों से ही इस संकट का समाधान निकाला जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो यह विवाद वैश्विक शांति के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।
This is COMPLETELY A NO NO. WHERE WAS ANTI CORRUPTION 😳 https://t.co/6za4cvc6gm
— Lalit Kumar Modi (@LalitKModi) April 11, 2026
अमेरिका की चेतावनी और बढ़ता तनाव
इस बीच अमेरिका ने चीन को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने चेतावनी दी है कि अगर चीन ईरान को हथियार सपोर्ट देता है, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इस पर Khalid Rasheed Firangi Mahali ने कहा कि इस तरह की धमकियां हालात को और बिगाड़ सकती हैं। उनका मानना है कि अमेरिका को अन्य देशों को चेतावनी देने के बजाय बातचीत और समझौते के रास्ते पर चलना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि मौजूदा स्थिति में शांति बनाए रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।
शिया पर्सनल लॉ बोर्ड का बयान
US Iran Talks फेल होने पर ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव Maulana Yasoob Abbas ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि किसी भी समझौते की शर्तें अमेरिका के नहीं, बल्कि ईरान के हितों के अनुसार तय होंगी। उनका कहना है कि ईरान पर दबाव डालकर समझौता नहीं कराया जा सकता। उन्होंने अमेरिका के “पहले से जीतने” के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर अमेरिका जीत गया है, तो फिर बातचीत की जरूरत क्यों पड़ रही है। साथ ही उन्होंने इजरायल के बयानों और अमेरिकी रुख को भी इस पूरे विवाद को और जटिल बनाने वाला बताया। उनका स्पष्ट कहना था कि समझौता तभी संभव है जब दोनों पक्ष बराबरी के आधार पर बात करें।
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