कानपुर में रिंग रोड परियोजना के दौरान भूमि अधिग्रहण में कथित गड़बड़ी और मुआवजा घोटाले के आरोपों के बीच लेखपाल आलोक दुबे ने प्रशासन द्वारा किए गए स्थानांतरण को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। आलोक दुबे का कहना है कि वर्ष 2024 में उन्हें फतेहपुर जिले में स्थानांतरित किया गया था। उस समय उन्हें हाईकोर्ट का स्थगन आदेश प्राप्त था, जो नए स्थानांतरण पर रोक लगाता था। बावजूद इसके, प्रशासन ने उन्हें बिल्हौर तहसील में स्थानांतरित कर दिया। इस कदम के विरोध में उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और ट्रांसफर को रोकने की याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने अब प्रशासन से पूरी रिपोर्ट तलब की है और मामले की आगे की सुनवाई की तारीख तय की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हाईकोर्ट आलोक दुबे के पक्ष में आदेश जारी करता है तो उनका वर्तमान स्थानांतरण रद्द हो सकता है। वहीं, प्रशासन का पक्ष मान्य होने पर उनका ट्रांसफर वैध माना जाएगा। इस मामले ने कानपुर प्रशासन में हलचल पैदा कर दी है और स्थानीय स्तर पर भी यह चर्चा का विषय बन गया है।
मुआवजे घोटाले और फर्जी दस्तावेज
आलोक दुबे पर आरोप है कि उन्होंने रिंग रोड परियोजना में भूमि अधिग्रहण के दौरान फर्जी दस्तावेज बनाकर करोड़ों रुपये के मुआवजे का गबन किया। प्रशासन ने इस मामले में 41 जमीन खरीद-बिक्री मामलों की जांच की, जिनमें उनके शामिल होने की पुष्टि हुई। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि उनकी कुल संपत्ति 30 करोड़ रुपये से अधिक है।
भ्रष्टाचार निवारण विभाग (एंटी करप्शन डिपार्टमेंट) भी इस मामले की गहनता से जांच कर रहा है। प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिले हैं कि आलोक दुबे की संलिप्तता काफी व्यापक है और कई अन्य अधिकारियों और दलालों के साथ मिलकर यह घोटाला किया गया। इससे रिंग रोड परियोजना में मुआवजे की रकम पर सवाल उठ गए हैं और प्रशासन ने भी इसकी गंभीरता को स्वीकार किया है।
स्थानीय मीडिया और नागरिक समाज भी इस मामले पर ध्यान दे रहे हैं। उनके अनुसार, अगर यह आरोप साबित होते हैं, तो यह न केवल कानपुर प्रशासन की छवि पर प्रभाव डालेगा बल्कि भूमि अधिग्रहण और मुआवजा प्रक्रिया में भी व्यापक सुधार की आवश्यकता को उजागर करेगा।
प्रशासनिक कार्रवाई और ट्रांसफर विवाद
जिलाधिकारी ने आलोक दुबे को कानूनगो से पदावनत कर लेखपाल बनाया और बिल्हौर तहसील में स्थानांतरित किया। प्रशासन का कहना है कि यह स्थानांतरण नियमों के अनुसार किया गया था। लेकिन आलोक दुबे का कहना है कि यह हाईकोर्ट के स्थगन आदेश की अवहेलना है।
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