उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले की तीर्थनगरी गढ़मुक्तेश्वर में प्राचीन काल भैरव मंदिर 45 साल बाद फिर से खुल गया। यह मंदिर दशकों तक भूमाफियाओं के अवैध कब्जे में रहा और मंदिर पर ताला डाल दिया गया था, जिससे श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए प्रवेश नहीं कर पा रहे थे। स्थानीय लोगों और धार्मिक विद्वानों के अनुसार, यह मंदिर गढ़मुक्तेश्वर की आस्था का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। मंदिर की बंदी ने न सिर्फ धार्मिक गतिविधियों को बाधित किया बल्कि समाज में चिंता और रोष का माहौल भी पैदा किया।
जिलाधिकारी के निरीक्षण के बाद हुई सख्त कार्रवाई
मामला तब सार्वजनिक हुआ जब जिलाधिकारी अभिषेक पांडेय गढ़मुक्तेश्वर में विकास कार्यों का निरीक्षण कर रहे थे। निरीक्षण के दौरान उन्होंने देखा कि मंदिर पर ताला जड़ दिया गया है और अतिक्रमण के कारण इसे बंद रखा गया है। जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए। प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची और ताले को तोड़कर अतिक्रमण हटाया गया। यह कार्रवाई मंदिर और स्थानीय धार्मिक भावनाओं की रक्षा के लिए अहम कदम माना जा रहा है।
काल भैरव की मूर्ति जल्द अपने मूल स्थान पर स्थापित होगी
काल भैरव मंदिर का अवैध कब्जा इतने सालों तक बना रहा कि मूर्ति को अन्य मंदिर में स्थानांतरित कर दिया गया था। अब प्रशासन ने घोषणा की है कि विधि-विधान के अनुसार मूर्ति को फिर से मंदिर में स्थापित किया जाएगा। यह कदम स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के लिए बेहद खुशी का विषय है। मंदिर के खुलने से न केवल श्रद्धालु अपनी आस्था निभा सकेंगे, बल्कि गढ़मुक्तेश्वर के धार्मिक महत्व को भी पुनः मान्यता मिलेगी।
टेंपल कॉम्प्लेक्स और धार्मिक पर्यटन को मिलेगी नई दिशा
जिलाधिकारी अभिषेक पांडेय ने यह भी कहा कि आने वाले समय में पूरे मंदिर परिसर को भव्य टेंपल कॉम्प्लेक्स के रूप में विकसित किया जाएगा। इससे न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि गढ़मुक्तेश्वर के समग्र विकास में भी मदद होगी। प्रशासन का यह कदम न सिर्फ धार्मिक स्थलों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि समाज में सकारात्मक संदेश देने वाला भी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह फैसला दशकों से चली आ रही समस्या का हल है और मंदिर अब नई पहचान के साथ लोगों के लिए खुला रहेगा।
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