उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले से न्याय व्यवस्था को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक बहुचर्चित हत्या मामले में अदालत द्वारा उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के तुरंत बाद दोषियों ने कोर्ट रूम में ही जज को खुलेआम धमकी दे डाली। मामला उस समय गंभीर हो गया जब सजा सुनने के बाद दोनों दोषी भड़क उठे और न्यायाधीश को यह कहते हुए धमकाने लगे कि उन्हें उनके घर और गांव तक की जानकारी है। यह घटना उस समय हुई जब अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे) निजेंद्र कुमार ने हत्या के मामले में फैसला सुनाया। कोर्ट में मौजूद लोगों के मुताबिक, दोषियों का व्यवहार आक्रामक और असामान्य था। घटना के बाद अदालत परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं।
क्या था पूरा मामला? खेत में कुचलकर की गई थी हत्या
यह मामला एक पुराने पारिवारिक विवाद से जुड़ा हुआ है। जानकारी के अनुसार, वादी रेणु की ननद अंजलि की शादी आरोपी जयदीप के बड़े भाई से हुई थी। शादी के बाद अंजलि ने अपने ससुराल पक्ष पर दहेज उत्पीड़न और अन्य गंभीर आरोप लगाए थे, जिनमें भारतीय दंड संहिता की धारा 498ए और 406 के तहत मुकदमे दर्ज किए गए थे। इन मामलों को लेकर दोनों परिवारों के बीच तनाव बढ़ता गया। आरोप है कि इसी रंजिश के चलते आरोपी जयदीप और पिंटू चौहान अंजलि के गांव मटोरा पहुंचे। वहां उन्होंने अंजलि के पिता को खेत से जबरन खींच लिया और उनके ऊपर गाड़ी चढ़ा दी। बताया गया कि आरोपियों ने गाड़ी को कई बार आगे-पीछे किया, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई। यह घटना बेहद क्रूर मानी गई और पुलिस ने हत्या की धारा 302 और 34 के तहत मुकदमा दर्ज किया था।
कोर्ट का फैसला और उसके बाद का तनावपूर्ण माहौल
लंबी सुनवाई और गवाहों के बयान के बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। जैसे ही फैसला सुनाया गया, दोनों दोषी बेकाबू हो गए और जज को धमकी देने लगे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, उन्होंने ऊंची आवाज में कहा कि वे जज के घर और गांव के बारे में सब जानते हैं। इस अप्रत्याशित व्यवहार से कोर्ट रूम में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत स्थिति संभाली और दोषियों को वहां से हटाया गया। घटना की गंभीरता को देखते हुए एडीजे निजेंद्र कुमार ने उत्तर प्रदेश के गृह सचिव, डीआईजी, एसपी बिजनौर और जिला जज को पत्र लिखकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी है। उन्होंने अपनी सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है।
सुरक्षा पर उठे सवाल, प्रशासन ने बढ़ाई चौकसी
इस घटना ने न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नए सिरे से बहस छेड़ दी है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत में इस तरह की धमकी बेहद गंभीर मामला है और इसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, दोषियों के खिलाफ कोर्ट में धमकी देने के मामले में अलग से कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही न्यायाधीश की सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए हैं। जिला प्रशासन ने कोर्ट परिसर में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी है। स्थानीय बार एसोसिएशन के सदस्यों ने भी इस घटना की निंदा की है और न्यायाधीशों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। फिलहाल मामला प्रशासनिक स्तर पर विचाराधीन है और आगे की कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा और अनुशासन बनाए रखना कितना जरूरी है।
