वाराणसी के कबीरचौरा स्थित महिला चिकित्सालय में एक बार फिर मानवता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। रेवड़ी तालाब की रहने वाली गर्भवती महिला रिजवाना को जब तेज़ प्रसव पीड़ा हुई, तो परिजन उन्हें देर रात इलाज के लिए अस्पताल ले गए। लेकिन वहाँ की व्यवस्थाओं ने संकट की घड़ी को और भी भयावह बना दिया। अस्पताल के कर्मचारियों ने न तो तुरंत भर्ती किया और न ही किसी चिकित्सकीय सहायता की व्यवस्था की। रिजवाना के परिजनों को कभी पर्ची न होने का हवाला देकर, तो कभी दूसरे अस्पताल भेजने की सलाह देकर गुमराह किया गया।
दर्द से तड़पती रही महिला, अस्पताल ने नहीं खोली उम्मीद की खिड़की
परिजनों के अनुसार, रिजवाना की हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी, लेकिन अस्पताल के कर्मचारी सिर्फ बहानेबाज़ी करते रहे। महिला का इलाज शुरू करने के बजाय उसे इधर-उधर भटकाया गया। ऐसे में जब परिजनों को कोई रास्ता नज़र नहीं आया, तो वे महिला को लेकर अस्पताल के बाहर निकल गए। इसी दौरान सड़क किनारे ही रिजवाना को प्रसव हो गया। आसपास मौजूद लोगों की मदद से किसी तरह प्राथमिक उपचार किया गया। गनीमत रही कि माँ और बच्चा दोनों सुरक्षित हैं, लेकिन इस पूरी घटना ने सरकारी चिकित्सा व्यवस्था की हकीकत को उजागर कर दिया।
खुद महिला ने सुनाई आपबीती, प्रशासन से कार्रवाई की मांग
रिजवाना ने बातचीत में इस बात की पुष्टि की कि उन्हें अस्पताल में भर्ती करने से मना कर दिया गया था। उन्होंने कहा, “मैं दर्द में तड़पती रही, पर किसी ने मदद नहीं की।” इस दर्दनाक घटना के बाद स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और दोषी कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की माँग की है। यह मामला न केवल प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि आम जनता को स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर किस स्तर तक उपेक्षा झेलनी पड़ती है। प्रशासन से उम्मीद है कि इस घटना को गंभीरता से लेते हुए जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाएगा।
