उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (PVVNL) की बिजली बिल राहत योजना के तीसरे चरण में 11 फरवरी तक 6 लाख से अधिक उपभोक्ताओं ने पंजीकरण कराकर योजना का लाभ उठाया है। आंकड़ों के अनुसार कुल 6,11,036 उपभोक्ताओं ने इस चरण में अपना रजिस्ट्रेशन कराया है। यह संख्या बताती है कि योजना को लेकर लोगों में कितनी उत्सुकता और भरोसा है।
इस योजना के अंतर्गत अब तक उपभोक्ताओं को 547.97 करोड़ रुपये की छूट दी जा चुकी है। लंबे समय से बकाया बिजली बिल से परेशान लोग इस अवसर का लाभ उठाकर अपने खातों को नियमित करा रहे हैं। योजना का मुख्य उद्देश्य उन उपभोक्ताओं को राहत देना है जो किसी कारणवश बिजली बिल का भुगतान नहीं कर पाए थे और अब भारी ब्याज के बोझ तले दबे हुए थे। तीसरे चरण में भारी संख्या में पंजीकरण यह संकेत देता है कि योजना जमीनी स्तर पर असर दिखा रही है।
किन शहरों में कितना मिला फायदा?
पश्चिमांचल के 14 जनपदों में यह योजना लागू है और अलग-अलग जोन में अलग-अलग स्तर पर लाभ मिला है। मुरादाबाद जोन में सबसे अधिक 1,37,199 उपभोक्ताओं ने पंजीकरण कराया और यहां 90.58 करोड़ रुपये की छूट दी गई। सहारनपुर जोन में 82,970 उपभोक्ताओं ने योजना में भाग लिया और 128.48 करोड़ रुपये की राहत प्रदान की गई।
मुजफ्फरनगर क्षेत्र में 74,825 उपभोक्ताओं ने पंजीकरण कराया, जहां 69.99 करोड़ रुपये की छूट दी गई। मेरठ जोन-2 में 60,129 उपभोक्ताओं ने योजना का लाभ लिया और 41.28 करोड़ रुपये की राहत मिली। इन आंकड़ों से साफ है कि मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और मुरादाबाद जैसे प्रमुख शहरों में लोगों ने योजना को गंभीरता से लिया। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के उपभोक्ताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है, जिससे राजस्व वसूली में भी सुधार हुआ है।
100% ब्याज माफी और मूलधन में छूट कैसे मिल रही है?
इस बिजली बिल राहत योजना की सबसे बड़ी खासियत है बकाया राशि के ब्याज पर 100 प्रतिशत छूट। यानी जिन उपभोक्ताओं का बिल लंबे समय से जमा नहीं हुआ था और जिन पर भारी ब्याज जुड़ गया था, उन्हें पूरा ब्याज माफ किया जा रहा है। इसके साथ ही मूल बकाया राशि पर भी 15 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है। इससे उपभोक्ताओं का कुल भुगतान काफी कम हो जा रहा है।
योजना में घरेलू श्रेणी (02 किलोवाट तक) और वाणिज्यिक श्रेणी (01 किलोवाट तक) के नेवर पेड, लांग अनपेड और विद्युत चोरी के मामलों को भी शामिल किया गया है। खास बात यह है कि विद्युत चोरी से जुड़े मामलों में भी 40 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है, जिससे पुराने विवादित मामलों के निस्तारण का रास्ता आसान हुआ है। आंकड़ों के मुताबिक, विद्युत चोरी श्रेणी के तहत 48,863 उपभोक्ताओं ने पंजीकरण कराया, जिनमें से 26,925 उपभोक्ताओं ने पूर्ण भुगतान कर योजना का लाभ प्राप्त कर लिया है। यह कुल पंजीकृत उपभोक्ताओं का 55.10 प्रतिशत है, जो योजना की सफलता को दर्शाता है।
प्रबंध निदेशक की अपील और आगे की राह
पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक रवीश गुप्ता ने कहा है कि यह योजना उपभोक्ताओं के लिए एक सुनहरा अवसर है। लंबे समय से लंबित बकाया को निपटाकर वे नियमित उपभोक्ता बन सकते हैं और भविष्य में बिना किसी कानूनी या वित्तीय दबाव के बिजली सुविधा का लाभ ले सकते हैं। उन्होंने अधिक से अधिक लोगों से योजना का लाभ उठाने की अपील की है ताकि वे ब्याज और जुर्माने के बोझ से मुक्त हो सकें।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की योजनाएं न केवल उपभोक्ताओं को राहत देती हैं, बल्कि बिजली विभाग की राजस्व वसूली को भी मजबूत बनाती हैं। बड़ी संख्या में पंजीकरण यह दर्शाता है कि लोग समाधान चाहते हैं और सरकार द्वारा दिए गए अवसर का लाभ उठाने के लिए तैयार हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि योजना के शेष चरणों में कितने और उपभोक्ता जुड़ते हैं और कुल कितनी राशि की वसूली और छूट का आंकड़ा सामने आता है। फिलहाल पश्चिमांचल के लाखों परिवारों के लिए यह योजना राहत की सांस लेकर आई है।
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