मुजफ्फरनगर के पौराणिक और धार्मिक महत्व वाले शुकतीर्थ क्षेत्र स्थित हनुमत धाम में रविवार को हिन्दू संघर्ष समिति की ओर से सनातन धर्म संसद का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से आए अनेक महामंडलेश्वर, पीठाधीश्वर, साधु-संत और धार्मिक गुरुओं ने शिरकत की। धर्म संसद की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार और पूजा-अर्चना के साथ हुई। मंच पर मौजूद संतों ने कहा कि वर्तमान समय विश्वस्तर पर बड़े बदलावों का दौर है, जिसमें भारत एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसी उद्देश्य के साथ सनातन संस्कृति, भारतीय परंपरा और धर्म की सुरक्षा को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।
भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग
धर्म संसद के दौरान कई संतों और वक्ताओं ने यह मांग जोरदार तरीके से उठाई कि भारत को आधिकारिक रूप से ‘हिंदू राष्ट्र’ घोषित किया जाए। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भविष्य में देश का अगला प्रधानमंत्री बनाए जाने की मांग भी सामूहिक रूप से रखी गई। इस मुद्दे पर उपस्थित साधु-संतों ने कहा कि योगी आदित्यनाथ का नेतृत्व दृढ़, स्पष्ट और राष्ट्रवादी विचारधारा से प्रेरित है, इसलिए उन्हें राष्ट्रीय नेतृत्व की जिम्मेदारी दी जानी चाहिए। कार्यक्रम के दौरान कुल 12 महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए, जिन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजा जाएगा।
स्वामी प्रबोधानंद गिरी: “दुनिया की नज़र भारत पर, समाधान केवल सनातन में”
कार्यक्रम के प्रमुख वक्ता महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानंद गिरी महाराज ने कहा कि वर्तमान में विश्व का माहौल कई स्तरों पर अशांत और संवेदनशील है। ऐसे समय में पूरे विश्व की निगाह भारत की ओर है, क्योंकि भारत ही वह देश है जिसकी आध्यात्मिक परंपरा और सनातन मूल्यों में वैश्विक समस्याओं का समाधान छिपा है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म पर लगातार हमले बढ़ रहे हैं और इसे बचाने के लिए हिन्दुओं को एकजुट होकर खड़ा होना होगा। गिरी महाराज ने दावा किया कि देश के नौ राज्यों में हिन्दू अब अल्पसंख्यक हो चुके हैं। साथ ही लगभग 2000 जिलों में से 500 जिलों और करीब 1500 तहसीलों में मुस्लिम आबादी बहुल हो गई है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी एक हिन्दू पर हमला पूरे हिन्दू समाज पर हमला माना जाना चाहिए।
धर्म संसद के प्रस्ताव और साधु-संतों की भावनाएं
कार्यक्रम में शामिल साधु-संतों ने हरिद्वार में हुई पिछली धर्म संसद का भी जिक्र किया, जहां विवादों के बाद कई संतों पर मुकदमे दर्ज किए गए थे। उन्होंने कहा कि धर्म और संतों के मुद्दों को राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि उनका उद्देश्य समाज और राष्ट्र को दिशा देना है। उपस्थित संतों ने जनसंख्या नियंत्रण कानून, धर्मांतरण पर रोक, गौ-रक्षा, धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और सनातन संस्कृति के संरक्षण जैसे विषयों पर भी अपनी राय रखी। सभी प्रस्तावों को एक दस्तावेज के रूप में तैयार किया गया, जिसे शासन-प्रशासन तक पहुंचाया जाएगा। धर्म संसद का समापन सामूहिक संकल्प के साथ हुआ जिसमें सभी ने सनातन की रक्षा और समाज में धार्मिक सद्भाव बनाए रखने की प्रतिज्ञा ली।
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