Friday, February 20, 2026
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‘मुसलमान नदी की पूजा करें, सूर्य नमस्कार करें तो…’ RSS मंच से दत्तात्रेय होसबाले का बयान, मची हलचल

गोरखपुर में हिंदू सम्मेलन के दौरान RSS सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने हिंदू धर्म को मानव धर्म बताते हुए नदी पूजा, सूर्य नमस्कार और प्राणायाम पर बड़ा बयान दिया। जानिए उन्होंने क्या कहा और इसके मायने क्या हैं।

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उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में आयोजित हिंदू सम्मेलन के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शीर्ष पदाधिकारी दत्तात्रेय होसबाले के बयान ने देशभर में चर्चा को तेज कर दिया है। 17 दिसंबर 2025 को खोराबार क्षेत्र के मालवीय नगर श्रीराम बस्ती खेल मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने हिंदू धर्म, हिंदुत्व और भारतीय संस्कृति को लेकर अपने विचार रखे। मंच से बोलते हुए उन्होंने कहा कि जब हिंदू धर्म की बात की जाती है तो उसे किसी एक पूजा पद्धति या समुदाय तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि यह एक व्यापक मानव धर्म है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दुनिया के किसी भी देश के लोग अपने-अपने पंथ और धार्मिक पहचान को बनाए रखते हुए इस मानव धर्म के मूल्यों का पालन कर सकते हैं।

नदी पूजा, सूर्य नमस्कार और प्राणायाम पर क्या बोले होसबाले

अपने संबोधन में दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि अगर नमाज पढ़ने वाले मुस्लिम भाई पर्यावरण की भावना से नदी की पूजा करें तो इसमें कोई बुराई नहीं है। उन्होंने सवालिया अंदाज में कहा कि अगर कोई सूर्य नमस्कार करता है या प्राणायाम करता है तो इसमें गलत क्या है। उन्होंने जोर देकर कहा कि संघ यह नहीं कहता कि कोई व्यक्ति अपनी मौजूदा पूजा पद्धति या धार्मिक आस्था को छोड़ दे। न ही यह कहा जा रहा है कि नमाज छोड़कर कोई दूसरी पूजा करनी चाहिए। उनका कहना था कि संघ का विचार यह है कि पर्यावरण संरक्षण, योग, प्राणायाम और प्रकृति के प्रति सम्मान जैसे विषय मानव धर्म का हिस्सा हैं। इन्हें अपनाने से किसी की धार्मिक पहचान पर कोई असर नहीं पड़ता।

हजारों साल संघर्ष कर टिके रहने वाली संस्कृति का जिक्र

दत्तात्रेय होसबाले ने अपने भाषण में भारतीय सभ्यता और संस्कृति के इतिहास की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म और संस्कृति हजारों वर्षों तक संघर्ष करते हुए भी टिके रहे हैं, चाहे कितने ही आक्रांताओं और चुनौतियों का सामना क्यों न करना पड़ा हो। उनके अनुसार यही कारण है कि भारत की भूमि आज भी अपनी सांस्कृतिक पहचान के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि हिंदू संस्कृति किसी के विरोध में नहीं, बल्कि सभी को साथ लेकर चलने वाली परंपरा है। इसी समावेशी सोच के कारण आज दुनिया के कई देश भारत की संस्कृति, योग, आयुर्वेद और संस्कृत के प्रति आकर्षित हो रहे हैं।

दुनिया में फैलती हिंदू संस्कृति और ‘विश्वगुरु’ का सपना

अपने संबोधन के अंतिम हिस्से में RSS सरकार्यवाह ने भारत की वैश्विक छवि और भविष्य की भूमिका पर बात की। उन्होंने कहा कि आज दुनिया भर में भारतीयों की बुद्धिमत्ता, प्रतिभा और परिश्रम का सम्मान हो रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि रूस में चर्च को मंदिर में बदलने की अनुमति दी गई, अमेरिका में जहां-जहां हिंदू रहते हैं वहां मंदिर बन रहे हैं और स्थानीय लोग सूर्य नमस्कार व प्राणायाम सीख रहे हैं। जर्मनी के विश्वविद्यालयों में संस्कृत पढ़ाई जा रही है और आयुर्वेद का अध्ययन हो रहा है। उन्होंने कहा कि भारत को विश्वगुरु बनाना है और इसके लिए हिंदू धर्म, हिंदुत्व और हिंदू संस्कृति की श्रेष्ठ बातों को अपने जीवन में उतारना हर नागरिक का कर्तव्य है। उनके अनुसार संस्कृति को बचाना किसी एक वर्ग की नहीं, बल्कि समाज के हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है।

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