Monday, February 2, 2026
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कोबरा के डंस से लाश बनता हुआ लड़का… 76 इंजेक्शन के बाद जो हुआ, उसने मेडिकल साइंस को भी हिला दिया!

कन्नौज में 15 वर्षीय बच्चे ने कोबरा के ज़हर से लड़ी ज़िंदगी की सबसे बड़ी जंग। डॉक्टरों ने दिए 76 इंजेक्शन, बची जान—पूरा गांव जश्न में।

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उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले में सोमवार को एक दिल दहला देने वाली घटना घटी। गाँव के खेतों में खेल रहे 15 वर्षीय आर्यन (परिवर्तित नाम) को अचानक झाड़ियों से निकलकर एक कोबरा ने डस लिया। चीख सुनकर परिवार और आस-पास के लोग दौड़े, तब तक बच्चे की हालत बिगड़ने लगी थी। उसके शरीर में ज़हर तेजी से फैलने लगा और वह बेहोश हो गया।

घबराए परिवार ने उसे बिना समय गंवाए पास के जिला अस्पताल पहुँचाया। वहां ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच के बाद पुष्टि की कि यह अत्यंत विषैला कोबरा बाइट है। तुरंत उसे इमरजेंसी वार्ड में भर्ती किया गया और एंटी-स्नेक वेनम इंजेक्शन लगाना शुरू किया गया।

डॉक्टरों की रातभर चली जंग, एक-एक इंजेक्शन से लौटी सांसें

आर्यन की नसों में जहर इतनी तेजी से फैल चुका था कि सामान्य डोज कारगर नहीं हो पा रही थी। डॉक्टरों ने स्थिति को गंभीर मानते हुए एंटी-स्नेक वेनम के 76 इंजेक्शन दिए। आमतौर पर एक मरीज को 10 से 20 डोज तक दी जाती है, लेकिन यह मामला उससे कई गुना अधिक था।

डॉक्टरों के मुताबिक, बच्चे का शरीर लगातार प्रतिक्रिया दे रहा था। इंजेक्शन की भारी मात्रा के बावजूद टीम ने हार नहीं मानी। करीब तीन घंटे तक यह जीवन-मृत्यु की लड़ाई चलती रही। ICU में डॉक्टरों की सतर्कता और नर्सिंग स्टाफ की मेहनत से आखिरकार आर्यन की सांसें सामान्य हुईं।

डॉक्टर ने बताया कैसे बची जान

मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि यह मामला मेडिकल हिस्ट्री में एक अनोखा उदाहरण बन गया है। उन्होंने कहा — “कोबरा बाइट में इतनी तेजी से जहर फैलना और इतने इंजेक्शन के बाद भी मरीज का बच जाना दुर्लभ है। यह पूरी टीम की जीत है।”

डॉक्टरों के मुताबिक, अगर परिवार 10 मिनट भी देर कर देता, तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती थी। समय पर पहुंचाना और सही इलाज ही बच्चे की जान बचाने में सबसे बड़ा कारण बना।

डॉक्टरों ने बताया कि बच्चे को 48 घंटे तक ICU में मॉनिटरिंग में रखा गया। उसके बाद धीरे-धीरे शरीर की सुन्नता और दर्द कम हुआ। अब वह पूरी तरह स्वस्थ है और सामान्य खाना भी खाने लगा है।

जब बच्चे की तबीयत सुधरने की खबर गांव पहुँची, तो पूरे इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई।
लोग अस्पताल पहुंचे और डॉक्टरों का धन्यवाद किया। बच्चे के पिता ने भावुक होकर कहा — “हम तो उम्मीद छोड़ चुके थे, लेकिन डॉक्टरों ने हमारे बेटे को नई जिंदगी दी है। वे हमारे लिए भगवान से कम नहीं।”

गांव के बुजुर्गों ने बताया कि यह पहली बार हुआ जब किसी ने कोबरा के डंक से इतने इंजेक्शन झेलकर जिंदगी जीती हो। लोग अब बच्चे को ‘चमत्कारी बालक’ कहकर पुकार रहे हैं।

इस घटना से मिला सबक: सांप के काटने पर करें ये काम

इस घटना के बाद डॉक्टरों ने लोगों को सलाह दी है कि किसी भी विषैले सांप के काटने पर घरेलू नुस्खों या झाड़-फूंक में समय न गंवाएं।

तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचें, क्योंकि हर सेकंड कीमती होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सही समय पर एंटी-स्नेक वेनम देने से 90% मामलों में जान बचाई जा सकती है। आर्यन का केस इस बात का प्रमाण है कि अगर हिम्मत और सही इलाज साथ हो, तो मौत जैसी लड़ाई भी जीती जा सकती है।

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