उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के जिला अस्पताल में बुधवार को उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया, जब संविदा पर काम कर रहे चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों ने अपनी लंबित सैलरी को लेकर नाराजगी जाहिर की। जानकारी के मुताबिक कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें पिछले छह महीने से वेतन नहीं मिला है, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। जैसे ही कर्मचारियों को पता चला कि उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक हापुड़ दौरे पर हैं, वे अपनी शिकायत लेकर जिला अस्पताल पहुंच गए। कर्मचारियों का इरादा साफ था कि वे सीधे डिप्टी सीएम को अपनी परेशानी बताकर न्याय की मांग करेंगे। कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि हर महीने पूरे 30 दिन का वेतन मिलने के बजाय उन्हें सिर्फ 26 दिन की ही सैलरी दी जा रही है, जिससे उन्हें लगातार नुकसान हो रहा है और घर चलाना मुश्किल होता जा रहा है।
CMO का रवैया बना विवाद की वजह, कर्मचारियों पर बरसे
कर्मचारियों का आरोप है कि जब वे अपनी समस्या लेकर अस्पताल में मौजूद मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. सुनील त्यागी के पास पहुंचे, तो उन्हें उम्मीद थी कि उनकी बात सुनी जाएगी और वेतन जारी कराने को लेकर कोई भरोसा मिलेगा। लेकिन कर्मचारियों का कहना है कि CMO का व्यवहार बेहद कठोर और अपमानजनक था। कर्मचारियों ने दावा किया कि CMO ने वेतन की समस्या पर कोई ठोस आश्वासन देने के बजाय उन्हें अनुशासनहीन करार दे दिया और नौकरी से हटाने की चेतावनी भी दे डाली। इस दौरान अस्पताल परिसर में मौजूद अन्य लोग भी स्थिति को देखकर हैरान रह गए। कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से काम कर रहे हैं, नियमित ड्यूटी करते हैं, फिर भी भुगतान न मिलना उनके साथ अन्याय है। इसी बात पर कर्मचारी और अधिकारी के बीच बहस बढ़ गई और देखते ही देखते मामला बवाल में बदल गया।
“गोली मारने” की धमकी का आरोप, अस्पताल परिसर में मचा हंगामा
घटना को लेकर कर्मचारियों की तरफ से सबसे गंभीर आरोप यह लगाया गया कि CMO ने उन्हें गोली मारने तक की धमकी दी। जैसे ही यह बात कर्मचारियों के बीच फैली, गुस्सा और बढ़ गया और अस्पताल परिसर में शोर-शराबा शुरू हो गया। कर्मचारी शेरुद्दीन समेत अन्य संविदा कर्मियों का कहना है कि वे सिर्फ अपने मेहनत की कमाई मांगने गए थे, लेकिन जवाब में उन्हें डराने-धमकाने की कोशिश की गई। कर्मचारियों ने बताया कि उनके जैसे 20 से 25 चतुर्थ श्रेणी संविदा कर्मियों को महीनों से भुगतान नहीं मिला, जबकि वे अस्पताल की जरूरी सेवाओं में लगातार ड्यूटी निभा रहे हैं। इस विवाद की वजह से कुछ देर के लिए अस्पताल का माहौल बिगड़ गया और अफरातफरी जैसी स्थिति बन गई। कर्मचारियों का कहना है कि यदि जल्द वेतन नहीं मिला, तो वे मजबूर होकर बड़े स्तर पर प्रदर्शन करेंगे और उच्च अधिकारियों तक अपनी शिकायत पहुंचाएंगे।
पुलिस ने संभाला मोर्चा, कर्मचारियों को समझाकर कराया शांत
जिला अस्पताल में बढ़ते हंगामे की सूचना मिलते ही मौके पर पुलिस भी पहुंच गई। पुलिस ने कर्मचारियों और उनके साथ आए नेताओं को समझाने की कोशिश की और माहौल को नियंत्रित किया। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद स्थिति धीरे-धीरे शांत हुई और कर्मचारियों को फिलहाल प्रदर्शन रोकने के लिए कहा गया। हालांकि कर्मचारियों का कहना है कि वे पीछे हटने वाले नहीं हैं, क्योंकि उनके घर की जिम्मेदारियां और खर्च चलाना अब मुश्किल हो गया है। कर्मचारियों ने मांग की है कि उनकी लंबित सैलरी तत्काल जारी की जाए और हर महीने पूरे 30 दिन का भुगतान तय नियमों के अनुसार मिले। वहीं दूसरी तरफ अस्पताल प्रशासन की ओर से कर्मचारियों की शिकायत और आरोपों को लेकर कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। अब यह मामला चर्चा का विषय बन गया है कि आखिर इतने महीनों तक वेतन रुका क्यों और इस मुद्दे पर अस्पताल में विवाद इतना बढ़ कैसे गया।
