उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने किसानों की आय बढ़ाने को लेकर एक बड़ा और दूरगामी विजन सामने रखा है। उन्होंने साफ कहा है कि प्रदेश में अब खेती का विस्तार जमीन बढ़ाकर नहीं, बल्कि एक ही जमीन से ज्यादा उत्पादन लेकर किया जाएगा। इसी सोच के तहत मुख्यमंत्री ने गन्ने के साथ दलहनी और तिलहनी अंतःफसली खेती को प्रदेश के कृषि भविष्य का नया मॉडल बताया है। सोमवार को इस विषय पर हुई उच्च स्तरीय बैठक में सीएम योगी ने कहा कि अगर इस मॉडल को सही तरीके से लागू किया गया, तो गन्ना किसानों की आय केवल दोगुनी नहीं बल्कि कई गुना तक बढ़ सकती है। उन्होंने इसे किसानों के लिए अतिरिक्त उत्पादन, अतिरिक्त लाभ और अतिरिक्त सुरक्षा देने वाला प्रयोग बताया। मुख्यमंत्री का मानना है कि यह मॉडल उत्तर प्रदेश को कृषि के क्षेत्र में एक नई पहचान दिला सकता है।
कम लागत, ज्यादा उत्पादन और तेज नकदी प्रवाह
सीएम योगी आदित्यनाथ ने बताया कि गन्ने के साथ सरसों, मसूर, उड़द और मूंग जैसी फसलों की अंतःफसली खेती किसानों के लिए बेहद फायदेमंद है। इन फसलों की लागत अपेक्षाकृत कम होती है, जबकि बाजार में इनकी मांग लगातार बनी रहती है। इससे किसानों को पूरे साल नकदी का बेहतर प्रवाह मिलता है और केवल एक फसल पर निर्भर रहने का जोखिम भी कम हो जाता है। सीएम योगी ने कहा कि एकल फसल खेती में मौसम, कीट या बाजार के उतार-चढ़ाव से किसान को बड़ा नुकसान हो सकता है, लेकिन अंतःफसली खेती इस जोखिम को काफी हद तक कम कर देती है। उन्होंने यह भी कहा कि इस मॉडल से न केवल किसानों की आय स्थिर होगी, बल्कि खेती ज्यादा टिकाऊ और संतुलित बनेगी, जो लंबे समय में प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगी।
मिशन मोड में लागू होगी योजना, तैयार होगा रोडमैप
सीएम योगी ने इस योजना को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक मिशन मोड में लागू करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि इसके लिए साल-दर-साल स्पष्ट रोडमैप तैयार किया जाए, ताकि लक्ष्य समय पर पूरे किए जा सकें। वर्तमान में उत्तर प्रदेश में करीब 29.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती होती है, जिसमें नया बोया गया क्षेत्र और पेड़ी दोनों शामिल हैं। सीएम योगी ने कहा कि इतने बड़े क्षेत्र में अगर तिलहन और दलहन की अंतःफसल जोड़ी जाती है, तो उत्पादन में ऐतिहासिक बढ़ोतरी हो सकती है। इससे न केवल प्रदेश, बल्कि देश को भी तिलहन और दलहन के मामले में आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह योजना सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि जमीन पर इसके ठोस और दिखने वाले परिणाम आने चाहिए।
वैज्ञानिक चयन और व्यापक कृषि बदलाव पर जोर
सीएम योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिया कि इस योजना को कृषि विज्ञान केंद्रों और कृषि विश्वविद्यालयों के माध्यम से लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि अंतःफसल का चयन वैज्ञानिक और व्यावहारिक आधार पर होना चाहिए, ताकि गन्ने की पैदावार पर कोई नकारात्मक असर न पड़े। उन्होंने आईआईएसआर की सिफारिशों का हवाला देते हुए रबी सीजन में सरसों और मसूर, जबकि जायद सीजन में उड़द और मूंग को प्राथमिकता देने का सुझाव दिया। सीएम योगी ने यह भी कहा कि यह योजना केवल गन्ना किसानों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे प्रदेश के व्यापक कृषि परिदृश्य में बदलाव के रूप में देखा जाना चाहिए। उनका मानना है कि अगर यह मॉडल सफल होता है, तो उत्तर प्रदेश देश के लिए टिकाऊ और लाभकारी खेती का उदाहरण बन सकता है, जहां किसान कम जोखिम में ज्यादा मुनाफा कमा सकेगा।
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