उत्तर प्रदेश विधानमंडल के शीतकालीन सत्र के दौरान सोमवार को सदन में उस समय माहौल गरमा गया, जब कोडीनयुक्त कफ सीरप को लेकर विपक्ष ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को हस्तक्षेप करना पड़ा। सीएम योगी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उत्तर प्रदेश में कोडीनयुक्त कफ सीरप से एक भी मौत नहीं हुई है। उन्होंने सदन में कहा कि प्रश्न पूछने से पहले तथ्यों का अध्ययन जरूरी है और सदन की गरिमा बनाए रखना सभी सदस्यों की जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि विपक्ष ने जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, बिना ठोस आधार के यह मुद्दा उठा दिया, जिस कारण उन्हें स्वयं खड़े होकर स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी। उनके बयान के बाद सत्ता पक्ष की ओर से मेज थपथपाकर समर्थन जताया गया।
एनडीपीएस कानून के तहत कार्रवाई
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सदन में बताया कि कोडीनयुक्त कफ सीरप के मामलों को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार पूरी तरह सतर्क है और ऐसे मामलों में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई की जाती है। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले को लेकर सरकार ने न्यायालय में मजबूती से पक्ष रखा और जीत हासिल की है। सीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि विपक्ष जिस तरह से इसे मौतों से जोड़ने की कोशिश कर रहा है, वह पूरी तरह भ्रामक है। राज्य में समय-समय पर संबंधित विभागों द्वारा छापेमारी और जांच अभियान चलाए जाते हैं ताकि अवैध गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके। उन्होंने यह भी जोड़ा कि कानून के दायरे में रहकर काम करने वालों को डरने की जरूरत नहीं है, लेकिन अवैध कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ सरकार की नीति ‘जीरो टॉलरेंस’ की है।
नेता प्रतिपक्ष पर तंज, समाजवादी पार्टी पर सीधे आरोप
सीएम योगी आदित्यनाथ ने सदन में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि आमतौर पर इस उम्र में व्यक्ति सच बोलने का आदी हो जाता है, लेकिन समाजवादी पार्टी के लोग उनसे भी झूठ बुलवा देते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है और विपक्ष को सच के साथ खड़ा होना चाहिए। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि माता प्रसाद पांडेय ने लंबे समय तक विधानसभा अध्यक्ष के रूप में सदन की गरिमा को बनाए रखा है, इसलिए उनसे ऐसी अपेक्षा नहीं थी। सीएम ने आरोप लगाया कि वर्ष 2016 में समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान यूपी के एक बड़े होलसेलर को लाइसेंस दिया गया था, जिसे बाद में एसटीएफ ने पकड़ा। इससे यह स्पष्ट होता है कि अवैध नेटवर्क की जड़ें पुरानी सरकारों के समय में पनपी थीं, न कि मौजूदा सरकार में।
यूपी में उत्पादन नहीं, बाहर से आता है सीरप
मुख्यमंत्री ने सदन में यह भी साफ किया कि उत्तर प्रदेश में कोडीनयुक्त कफ सीरप का कोई उत्पादन नहीं होता। यहां केवल इसके स्टॉकिस्ट और होलसेलर मौजूद हैं। सीएम के अनुसार, इस तरह के कफ सीरप का उत्पादन मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और कुछ अन्य राज्यों में होता है। जिन मौतों का हवाला दिया जा रहा है, वे भी अन्य राज्यों से जुड़े मामले हैं। उन्होंने बताया कि कुछ घटनाएं तमिलनाडु में बने सीरप से जुड़ी हैं। सीएम योगी ने पूरे मामले को ‘इललीगल डायवर्जन’ करार दिया और कहा कि कुछ होलसेलरों ने इसे उन राज्यों और देशों में भेजा, जहां शराबबंदी है। वहां नशे के आदी लोग इसका दुरुपयोग करते हैं। सरकार ऐसे नेटवर्क को तोड़ने के लिए लगातार कार्रवाई कर रही है और आगे भी सख्ती जारी रहेगी। मुख्यमंत्री के इस विस्तृत जवाब के बाद सदन में मामला काफी हद तक शांत होता नजर आया।
