लखीमपुर खीरी में आयोजित एक बड़े कार्यक्रम में योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को ऐतिहासिक फैसला लेते हुए सैकड़ों परिवारों को भूमि के मालिकाना हक के पट्टे सौंपे। इस कार्यक्रम में खास तौर पर बांग्लादेश से आए विस्थापित हिंदू परिवारों और थारू जनजाति के लोगों को लाभ मिला। बताया गया कि करीब 331 परिवारों को यह अधिकार मिला, जो पिछले कई दशकों से अपनी जमीन के कानूनी हक का इंतजार कर रहे थे। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कई विकास परियोजनाओं की भी शुरुआत की, जिनकी कुल लागत 1300 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है।
सात दशकों का इंतजार खत्म, मिला मालिकाना हक
लखीमपुर खीरी कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सिर्फ जमीन के कागज देने का मामला नहीं है, बल्कि यह उन परिवारों के सम्मान और सुरक्षा से जुड़ा विषय है, जो वर्षों से अपने अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे थे। बांग्लादेश से आए इन विस्थापित परिवारों ने करीब 70 साल तक इंतजार किया, तब जाकर उन्हें यह अधिकार मिला। योगी आदित्यनाथ ने इसे सरकार की बड़ी जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि हर नागरिक को उसके अधिकार दिलाना ही असली शासन है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार लगातार ऐसे लोगों को मुख्यधारा में लाने के लिए काम कर रही है।
सभा में दिया बड़ा संदेश: “जनता का कल्याण ही असली शासन”
लखीमपुर खीरी में सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने प्राचीन शास्त्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि “प्रजासुखे सुखं राज्ञः” यानी शासक का सुख तभी है जब उसकी प्रजा खुश हो। उन्होंने कहा कि किसी भी सरकार की सफलता उसकी व्यक्तिगत उपलब्धियों से नहीं, बल्कि जनता की खुशी से मापी जानी चाहिए। उन्होंने साफ कहा कि शासन का असली उद्देश्य लोगों के जीवन को बेहतर बनाना होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने प्रशासन को भी सख्त संदेश देते हुए कहा कि किसी भी गरीब या किसान के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए और किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
विकास योजनाओं का शिलान्यास, पारदर्शिता पर जोर
लखीमपुर खीरी के दौरान योगी आदित्यनाथ ने 1300 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का शिलान्यास भी किया। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य सिर्फ योजनाएं शुरू करना नहीं, बल्कि उन्हें समय पर पूरा करना भी है। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि जमीन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी और किसी भी अधिकारी द्वारा गलत काम करने पर सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार जनता के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस कार्यक्रम ने न सिर्फ प्रभावित परिवारों के जीवन में नई उम्मीद जगाई, बल्कि प्रदेश में विकास और सुशासन के संदेश को भी मजबूत किया।
