Brij Bhushan Sharan Singh: उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों ब्राह्मण और ठाकुर समाज के बीच कथित टकराव की चर्चा तेज है। इसी मुद्दे पर गोंडा से पूर्व सांसद और बीजेपी नेता बृज भूषण शरण सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यूपी में ब्राह्मण-ठाकुर की कोई लड़ाई नहीं है। उन्होंने कहा कि कुछ व्यक्तिगत घटनाओं को आधार बनाकर पूरे प्रदेश में जातीय संघर्ष का माहौल बताना गलत है। उनका तर्क था कि अगर सचमुच ऐसा टकराव होता तो वह चार दशकों तक लगातार जनप्रतिनिधि कैसे बनते रहते। उन्होंने बताया कि उनके क्षेत्र में ठाकुर वोट पांचवें नंबर पर आते हैं, इसके बावजूद वह छह बार सांसद चुने गए। एक बार उनकी पत्नी और एक बार उनके बेटे ने भी सांसद के रूप में जनता का प्रतिनिधित्व किया। Brij Bhushan Sharan Singh ने कहा कि यह जनता के भरोसे और सामाजिक संतुलन का प्रमाण है, न कि किसी जातीय ध्रुवीकरण का परिणाम। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि 40 ब्राह्मण विधायक बैठक कर लें तो इसे विवाद के रूप में नहीं देखना चाहिए, क्योंकि लोकतंत्र में विचार-विमर्श स्वाभाविक प्रक्रिया है।
राजनीतिक समीकरण और सामाजिक संतुलन पर दिया जोर
बृज भूषण शरण सिंह (Brij Bhushan Sharan Singh) ने कहा कि उत्तर प्रदेश की राजनीति को केवल जातीय नजरिए से देखना सही नहीं है। उन्होंने दावा किया कि उनके राजनीतिक जीवन में सभी वर्गों का समर्थन रहा है। उनका कहना था कि अगर ब्राह्मण-ठाकुर संघर्ष की बात सच होती तो इतने वर्षों तक जनसमर्थन मिलना संभव नहीं होता। उन्होंने यह भी कहा कि समाज में कभी-कभी स्थानीय स्तर पर विवाद हो सकते हैं, लेकिन उसे व्यापक सामाजिक लड़ाई कहना अतिशयोक्ति है। उनके मुताबिक प्रदेश में विकास, कानून-व्यवस्था और सामाजिक समरसता जैसे मुद्दे अधिक महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि राजनीतिक विरोधियों द्वारा कई बार माहौल को अलग दिशा देने की कोशिश की जाती है। ऐसे में नेताओं और समाज के जिम्मेदार लोगों को संयमित भाषा का उपयोग करना चाहिए, ताकि समाज में अनावश्यक तनाव न फैले।
UGC विरोध और सवर्ण समाज पर Brij Bhushan Sharan Singh का बयान
दिल्ली में चल रहे UGC से जुड़े विरोध प्रदर्शन पर भी बृज भूषण शरण सिंह ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन भाषा और व्यवहार मर्यादित होना चाहिए। उनका कहना था कि कुछ लोग पेशेवर तरीके से विरोध करते हैं और सोशल मीडिया पर रील बनाकर माहौल गरमाते हैं। उन्होंने कहा कि चाहे सवर्ण समाज की ओर से कोई प्रतिक्रिया आए या दलित समाज की ओर से, सभी को संयम बरतना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सवर्णों की संख्या को केवल 10 प्रतिशत बताना सही नहीं है। उनके अनुसार समाज का बड़ा वर्ग खुद को सवर्ण मानता है और उसे भी नीतियों में बराबरी का ध्यान मिलना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि आरक्षण और प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों पर संतुलित दृष्टिकोण जरूरी है। उनका मानना है कि किसी भी वर्ग की अनदेखी करने से असंतोष बढ़ सकता है।
डेढ़ करोड़ के घोड़े पर सफाई, कहा—कीमत देने वाला ही बताए
बृज भूषण शरण सिंह (Brij Bhushan Sharan Singh) से हाल ही में चर्चा में आए महंगे घोड़े को लेकर भी सवाल पूछा गया। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति ने घोड़ा भेंट किया, उसी ने उसकी कीमत डेढ़ करोड़ रुपये बताई है और उन्होंने वही मान लिया है। उनका कहना था कि रेस के घोड़े अक्सर महंगे होते हैं और उनकी कीमत बाजार और नस्ल के आधार पर तय होती है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि एक अन्य व्यक्ति ने ढाई करोड़ रुपये का घोड़ा दिया है। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट किया कि ऐसे उपहार क्यों दिए जाते हैं, इसका जवाब देने वाला व्यक्ति ही बेहतर बता सकता है। इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा और तेज हो गई है। फिलहाल बृज भूषण शरण सिंह ने जातीय टकराव की अटकलों को खारिज करते हुए सामाजिक एकता पर जोर दिया है और अपने राजनीतिक अनुभव का हवाला देकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण-ठाकुर संघर्ष जैसी बातों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है।
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