उत्तर प्रदेश में हाल ही में आयोजित दरोगा (SI) भर्ती परीक्षा का एक सवाल अब बड़ा सियासी मुद्दा बन गया है। परीक्षा में पूछे गए एक प्रश्न के विकल्प में ‘पंडित’ शब्द होने को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में बहस छिड़ गई है। कई लोगों ने इसे ब्राह्मण समाज से जोड़कर आपत्ति जताई है और परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी से स्पष्टीकरण की मांग की है। इस मुद्दे ने धीरे-धीरे राजनीतिक रंग भी ले लिया है और अलग-अलग दलों के नेता इस पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। विवाद बढ़ने के बाद अब इस मामले में धार्मिक गुरु और कांग्रेस के पूर्व नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम का बयान सामने आया है, जिसने इस बहस को और तेज कर दिया है।
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने लगाया साजिश का आरोप
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने इस पूरे विवाद को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बदनाम करने की साजिश बताया है। उनका कहना है कि कुछ राजनीतिक दल जानबूझकर इस मुद्दे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं ताकि सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के कुछ नेता यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि योगी सरकार ब्राह्मण समाज के खिलाफ है, जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है। आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि इस तरह के आरोप लगाकर समाज में भ्रम पैदा करने की कोशिश की जा रही है और इसका मकसद सिर्फ राजनीतिक फायदा उठाना है।
विपक्ष पर साधा निशाना, जांच की मांग
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने आगे कहा कि इस विवाद के पीछे राजनीतिक षड्यंत्र हो सकता है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर किसी अधिकारी या जिम्मेदार व्यक्ति की लापरवाही से ऐसा सवाल परीक्षा में शामिल हुआ है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उनके मुताबिक समाज को जाति और धर्म के आधार पर बांटने की कोशिश करना सही नहीं है और इससे केवल राजनीति को फायदा होता है। उन्होंने विपक्षी नेताओं पर भी निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोग इस मुद्दे को लेकर बेवजह माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।
संभल मस्जिद मामले और विदेश नीति पर भी दी प्रतिक्रिया
इस दौरान आचार्य प्रमोद कृष्णम ने संभल मस्जिद मामले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी को लेकर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन को अदालत के आदेश का पूरी तरह पालन करना चाहिए और अधिकारियों को अपने बयान देते समय संयम बरतना चाहिए। किसी भी समुदाय को निशाना बनाना उचित नहीं है। वहीं देश की विदेश नीति पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि आज भारत वैश्विक स्तर पर मजबूत स्थिति में है और दुनिया भारत के फैसलों को गंभीरता से देखती है। उनका कहना था कि देश की छवि को कमजोर करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए और राजनीतिक मतभेदों के बावजूद राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
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