Tuesday, March 3, 2026
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शंकराचार्य के नाम पर सियासी संग्राम! यूपी में क्यों भिड़ गए अखिलेश और केशव?

यूपी में शंकराचार्य के मुद्दे पर राजनीति तेज। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और सपा प्रमुख अखिलेश यादव के बीच बयानबाजी, एसआईआर-2026 और बीएलओ की आत्महत्या के आरोपों से बढ़ी हलचल।

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उत्तर प्रदेश में शंकराचार्य के मुद्दे पर सियासत गरमा गई है। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने साफ कहा कि जगद्गुरु शंकराचार्य हिंदू धर्म में भगवान के समान हैं। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य जहां भी जाएंगे, भाजपा कार्यकर्ता उनका स्वागत करेंगे क्योंकि वे रामभक्त हैं। केशव मौर्य ने यह बयान सर्किट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए दिया। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश में कानून का राज है और किसी अपराधी या गो तस्कर की हिम्मत नहीं कि वह गौमाता को नुकसान पहुंचा सके। उनके अनुसार गाय पूजनीय है और उसे किसी सरकारी दर्जे की जरूरत नहीं है। उन्होंने प्रधानमंत्री के नेतृत्व की तारीफ करते हुए कहा कि देश में विकास की लहर है और भाजपा लंबे समय तक सत्ता में रहेगी।

अखिलेश पर लगाया ‘ढोंग’ का आरोप

डिप्टी सीएम ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि शंकराचार्य को समर्थन देना उनका राजनीतिक दांव है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार के समय रामभक्तों और शिवभक्तों के साथ अच्छा व्यवहार नहीं हुआ और गो तस्करों को संरक्षण मिला। अब चुनाव नजदीक आते ही हिंदुत्व की बात की जा रही है। केशव मौर्य ने कहा कि जनता सब समझती है और सिर्फ वोट के लिए धर्म का नाम लेना सही नहीं है।

एसआईआर-2026 और बीएलओ की मौत पर सपा का हमला

इधर अखिलेश यादव ने एसआईआर-2026 को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बीएलओ पर गलत काम करने का दबाव डाला जा रहा है। उनके मुताबिक पहले सही नाम हटवाने का दबाव था और अब फर्जी नाम जोड़ने की कोशिश की जा रही है। अखिलेश यादव ने फतेहपुर जिले के एक शिक्षामित्र और बीएलओ की आत्महत्या का मामला उठाया। उनका कहना है कि ज्यादा दबाव और बेटी की शादी के लिए छुट्टी न मिलने की वजह से उन्होंने यह कदम उठाया। सपा प्रमुख ने कर्मचारियों से अपील की कि वे हिम्मत न हारें और अपने परिवार के बारे में सोचें।

आरोप-प्रत्यारोप से गर्म हुई राजनीति

इस पूरे मामले के बाद प्रदेश की राजनीति और तेज हो गई है। भाजपा का कहना है कि विपक्ष बिना सबूत के आरोप लगा रहा है और सरकार बदनाम करने की कोशिश कर रहा है। वहीं सपा का कहना है कि प्रशासनिक दबाव से कर्मचारी परेशान हैं और सरकार संवेदनहीन हो गई है। शंकराचार्य के सम्मान से शुरू हुआ यह विवाद अब चुनावी माहौल में बड़ा मुद्दा बन गया है। दोनों दल एक-दूसरे पर लगातार हमला कर रहे हैं और आने वाले समय में यह सियासी टकराव और बढ़ सकता है।

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