दीपोत्सव 2025 में अयोध्या एक बार फिर रोशनी की समंदर में नहाई दिखाई दी। रविवार की शाम जैसे ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राम मंदिर से दीपोत्सव का शुभारंभ किया, वैसे ही 56 घाटों पर एक साथ दीयों की लौ टिमटिमाने लगी। महज 15 मिनट में 26 लाख से अधिक दीपक जल उठे और आसमान से दिखाई दे रहा था मानो पूरी अयोध्या सुनहरी चादर में लिपट गई हो।
इस भव्य आयोजन ने न सिर्फ श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध किया बल्कि एक नहीं दो नए रिकॉर्ड भी बना डाले। मौके पर ही गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के अधिकारियों ने दो विश्व रिकॉर्ड दर्ज करने की घोषणा की — पहला 26 लाख से अधिक दीप जलाने का और दूसरा 2128 वेदाचार्यों द्वारा एक साथ महाआरती का। यह नजारा देखकर घाटों से लेकर आसमान में मंडराते ड्रोन तक सिर्फ “जय श्रीराम” की गूंज सुनाई दे रही थी।
गिनीज में दर्ज हुआ इतिहास — ड्रोन शो से गूंजा आसमान
दीपोत्सव की सबसे बड़ी खासियत रही रोशनी और आस्था का ऐसा संगम, जो इससे पहले कभी नहीं देखा गया। जैसे ही घाटों पर दीयों की कतारें सजीं, वैसे ही आसमान में 1100 ड्रोन उड़ान भरते नजर आए। इन ड्रोन ने हवा में भगवान राम की आकृति बनाई, जिसके बाद लेजर शो ने माहौल को और भी दिव्य बना दिया। सरयू तट पर 2128 वेदाचार्यों ने एक साथ महाआरती कर एक नया विश्व रिकॉर्ड कायम किया। घाटों पर उमड़े लाखों श्रद्धालु इस पल के साक्षी बने और रोशनी से नहाई अयोध्या की तस्वीरें पूरी दुनिया में छा गईं।
इस भव्य आयोजन का प्रमाण पत्र मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मंच पर ही सौंपा गया। इस दौरान देश-विदेश से आए पर्यटकों ने भी इस ऐतिहासिक क्षण को कैमरे में कैद किया। राम की पैड़ी पर लेजर शो और आसमान में गूंजती मंत्रोच्चारण ने पूरे माहौल को आस्था से भर दिया।
विपक्ष पर योगी का वार — ‘जहां गोलियां चलती थीं, वहां अब दीप जलते हैं’
आयोजन के मंच से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, “2017 में जब हमने दीपोत्सव मनाने का निर्णय लिया था, तब कुछ लोग इसका मजाक उड़ाते थे। आज वही अयोध्या पूरी दुनिया के लिए आस्था और विकास का प्रतीक बन चुकी है।”
उन्होंने कहा कि अतीत में विपक्ष ने राम जन्मभूमि आंदोलन को मिथक करार दिया था, लेकिन आज उसी धरती पर रिकॉर्ड बन रहे हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जहां कभी गोलियां चलती थीं, वहां अब दीप जलते हैं और यही नए भारत की तस्वीर है। उन्होंने बताया कि इस बार पूरे उत्तर प्रदेश में कुल 1.51 करोड़ दीपक जलाए गए — यह भी एक बड़ा कीर्तिमान है।
