उत्तर प्रदेश के नोएडा से सामने आई एक दर्दनाक घटना ने पूरे प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. सेक्टर-150 में एक निर्माणाधीन मॉल के बेसमेंट की खुदाई में भरे पानी में डूबकर सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत ने हर किसी को झकझोर दिया. यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि लापरवाही, उदासीनता और गैर-जिम्मेदाराना रवैये की भयावह तस्वीर बनकर सामने आया है. बताया जा रहा है कि बेसमेंट की खुदाई के बाद वहां महीनों से पानी भरा हुआ था, जिसे न तो सुरक्षित किया गया और न ही किसी तरह की चेतावनी लगाई गई. हादसे के वक्त युवराज का पिता भी मौके पर मौजूद था और अपने बेटे को पानी में डूबते देखता रहा, लेकिन तमाशबीन बने सिस्टम ने समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया. यही वजह रही कि एक होनहार इंजीनियर की जान चली गई और मामला मुख्यमंत्री तक पहुंच गया.
बिल्डर अभय कुमार गिरफ्तार
इस मामले में अब बड़ी कार्रवाई सामने आई है. नोएडा पुलिस ने नामजद आरोपी बिल्डर अभय कुमार को गिरफ्तार कर लिया है. नॉलेज पार्क कोतवाली पुलिस ने दो बिल्डर कंपनियों एमजे विशटाउन और लोटस ग्रीन के खिलाफ मामला दर्ज किया था. आरोप है कि इन कंपनियों ने बेसमेंट की खुदाई के बाद उसे खतरनाक स्थिति में छोड़ दिया और सुरक्षा मानकों का पूरी तरह उल्लंघन किया. न तो साइट को घेराबंदी की गई, न ही वहां किसी तरह की निगरानी रखी गई. पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में साफ हुआ है कि बिल्डर की घोर लापरवाही की वजह से यह हादसा हुआ. हालांकि, सवाल अभी भी कायम है कि सिर्फ बिल्डर ही दोषी है या फिर इस मौत के पीछे कई और जिम्मेदार चेहरे हैं, जिन पर अब तक कार्रवाई नहीं हुई है.
CM योगी का सख्त रुख, नोएडा प्राधिकरण के CEO पर गिरी गाज
इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के बाद मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंचा, जिसके बाद प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया. मुख्यमंत्री ने पूरे प्रकरण का संज्ञान लेते हुए नोएडा प्राधिकरण के सीईओ डॉ. लोकेश एम. को पद से हटाकर प्रतीक्षारत कर दिया. यही नहीं, मेरठ जोन के एडीजी भानू भास्कर के नेतृत्व में तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया है. इस टीम में मेरठ मंडल के मंडलायुक्त भानू चंद्र गोस्वामी और पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर अजय वर्मा भी शामिल हैं. SIT को पांच दिनों के भीतर जांच पूरी कर मुख्यमंत्री को रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं. सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री इस बात से बेहद नाराज थे कि मौके पर मौजूद प्रशिक्षित बचाव दल ने पानी में उतरकर युवक को बचाने की कोशिश नहीं की, जबकि एक डिलीवरी ब्वॉय बिना किसी प्रशिक्षण के पानी में उतर गया. इस पूरे घटनाक्रम ने गौतमबुद्ध नगर को यूपी की ‘शो विंडो’ कहे जाने वाले दावे की पोल खोल दी.
SIT जांच से खुलेगा सच, जिम्मेदारों पर गिरेगी गाज?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ निर्देश दिए हैं कि प्रदेश भर में ऐसे सभी दुर्घटना संभावित क्षेत्रों को चिन्हित किया जाए और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों. SIT यह जांच करेगी कि किस स्तर पर लापरवाही हुई, प्राधिकरण, दमकल विभाग, पुलिस और एसडीआरएफ की भूमिका क्या रही और आखिर क्यों समय रहते युवराज को बचाया नहीं जा सका. वहीं नोएडा प्राधिकरण ने भी आंतरिक जांच के लिए कमेटी गठित कर दी है. अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी सतीश पाल ने महाप्रबंधक (सिविल) से जल्द रिपोर्ट तलब की है. जांच में सिविल, नियोजन और तकनीकी विभागों की भूमिका भी परखी जाएगी. यह मामला स्पोर्ट्स सिटी प्रकरण से जुड़ा होने के कारण सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के निर्देशों को भी ध्यान में रखा जाएगा. अब सबकी नजर SIT की रिपोर्ट पर टिकी है, जो यह तय करेगी कि युवराज की मौत महज हादसा थी या फिर लापरवाही की लंबी श्रृंखला का नतीजा. बड़ा सवाल यही है कि क्या सभी दोषियों पर कार्रवाई होगी या फिर कुछ नाम फिर से सिस्टम की फाइलों में दबकर रह जाएंगे.
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