उत्तर प्रदेश में सरकारी भर्तियों को लेकर एक बार फिर सख्ती का संदेश दिया गया है। सीएम योगी नियुक्ति फर्जीवाड़ा जांच के आदेश के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कथित तौर पर नियुक्ति और तैनाती में हुई गड़बड़ियों को गंभीरता से लेते हुए विस्तृत जांच कराने का निर्देश दिया है। बताया जा रहा है कि कुछ विभागों में विज्ञापित पदों से अधिक लोगों की तैनाती और चयन प्रक्रिया में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं, जिसके बाद सरकार ने सख्त रुख अपनाया।
सरकार का मानना है कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और नियमों के अनुसार होनी चाहिए। यदि किसी स्तर पर नियमों की अनदेखी हुई है, तो उसकी जवाबदेही तय की जाएगी। इस फैसले को प्रशासनिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। सीएम योगी नियुक्ति फर्जीवाड़ा जांच के आदेश से साफ संकेत गया है कि सरकार किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं करेगी।
हर जिले में बनेगी तीन सदस्यीय जांच कमेटी
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश के सभी जिलों में तीन सदस्यीय जांच समितियां गठित करने के निर्देश दिए गए हैं। इन समितियों को संबंधित भर्ती और तैनाती से जुड़े सभी दस्तावेजों की बारीकी से जांच करनी होगी। आवेदन पत्र, चयन सूची, नियुक्ति पत्र, ज्वाइनिंग रिकॉर्ड और रिक्त पदों का विवरण—सब कुछ खंगाला जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, जांच समितियों को तय समय सीमा के भीतर अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपनी होगी। सीएम योगी नियुक्ति फर्जीवाड़ा जांच की इस प्रक्रिया में विशेष ध्यान इस बात पर रहेगा कि कहीं विज्ञापन में दर्शाई गई रिक्तियों से अधिक नियुक्तियां तो नहीं की गईं। यदि कहीं भी चयन और तैनाती के आंकड़ों में अंतर पाया गया, तो संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई संभव है।
यह भी बताया जा रहा है कि कुछ पुराने वर्षों की भर्तियों की फाइलें भी दोबारा देखी जाएंगी। इससे उन मामलों पर भी रोशनी पड़ सकती है जो अब तक सामने नहीं आए थे।
चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग से उठे सवाल
जानकारी के मुताबिक, नियुक्ति से जुड़ी अनियमितताओं की शुरुआत चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की भर्ती प्रक्रिया को लेकर हुई शिकायतों से हुई। आरोप है कि कुछ पदों पर विज्ञापन से अधिक अभ्यर्थियों को तैनाती दी गई। इसी आधार पर सरकार ने व्यापक जांच का निर्णय लिया।
सीएम योगी नियुक्ति फर्जीवाड़ा जांच के दायरे में केवल हालिया भर्तियां ही नहीं, बल्कि पूर्व वर्षों की नियुक्तियां भी लाई जा सकती हैं। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि कहीं लंबे समय से कोई गड़बड़ी तो नहीं चल रही थी।
सरकार का कहना है कि यदि किसी ने नियमों को दरकिनार कर नियुक्ति दी है या फर्जी दस्तावेजों के आधार पर तैनाती हासिल की है, तो उस पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। वहीं ईमानदारी से चयनित अभ्यर्थियों को चिंता करने की जरूरत नहीं है। जांच का उद्देश्य केवल व्यवस्था को पारदर्शी बनाना है।
पारदर्शिता पर जोर, दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई
प्रदेश सरकार लगातार यह दावा करती रही है कि उसकी प्राथमिकता पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन है। ऐसे में सीएम योगी नियुक्ति फर्जीवाड़ा जांच का आदेश उसी दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जांच निष्पक्ष हो और किसी भी स्तर पर ढिलाई न बरती जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच में अनियमितताएं साबित होती हैं, तो न केवल संबंधित कर्मचारियों पर कार्रवाई होगी, बल्कि भविष्य की भर्तियों के लिए भी नई व्यवस्था बनाई जा सकती है। इससे भर्ती प्रक्रिया में तकनीकी निगरानी और कड़े नियम लागू किए जा सकते हैं।
इस कार्रवाई से यह संदेश गया है कि सरकारी नौकरी में किसी भी तरह की हेराफेरी या फर्जीवाड़ा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अब सबकी नजरें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो तय करेगी कि आरोप कितने सही हैं और किन-किन पर कार्रवाई होगी।
