Monday, March 9, 2026
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लखनऊ में 11 मार्च को होगा बड़ा खुलासा? शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के कार्यक्रम में ‘असली-नकली संतों’ की पहचान पर मचेगा घमासान

लखनऊ में 11 मार्च को शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का बड़ा कार्यक्रम होने जा रहा है, जिसमें असली और नकली संतों की पहचान पर चर्चा होगी। अयोध्या में प्रतिनिधि ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए सरकार और बीजेपी पर भी सवाल उठाए।

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अयोध्या में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के विशेष प्रतिनिधि देवेंद्र पांडेय (गोप जी) ने मीडिया से बातचीत करते हुए 11 मार्च को लखनऊ में आयोजित होने वाले एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह आयोजन सनातन धर्म से जुड़े कई मुद्दों को लेकर आयोजित किया जा रहा है, जिसमें समाज के सामने कुछ बड़े सवाल भी रखे जाएंगे। उनके अनुसार इस कार्यक्रम का उद्देश्य सनातन परंपरा की रक्षा करना और उन लोगों की पहचान करना है जो संतों का वेश धारण करके समाज को भ्रमित करने का काम कर रहे हैं। देवेंद्र पांडेय ने कहा कि इस कार्यक्रम में देश के अलग-अलग हिस्सों से संत, धर्माचार्य और सनातन धर्म से जुड़े लोग शामिल होंगे। इस आयोजन के माध्यम से धार्मिक परंपराओं को मजबूत करने और समाज में जागरूकता बढ़ाने की कोशिश की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में कई ऐसे लोग सामने आ रहे हैं जो भगवा वस्त्र पहनकर खुद को संत बताते हैं, लेकिन उनके कार्य सनातन धर्म की मर्यादाओं के अनुरूप नहीं होते। इसलिए इस विषय पर खुलकर चर्चा होना जरूरी है।

सरकार और बीजेपी पर साधा निशाना

मीडिया से बातचीत के दौरान देवेंद्र पांडेय ने भारतीय जनता पार्टी और उत्तर प्रदेश सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि हिंदुत्व की जो परिभाषा आज पेश की जा रही है, वह संत समाज और धार्मिक परंपराओं के साथ न्याय नहीं कर रही है। उनके अनुसार कई महत्वपूर्ण धार्मिक मुद्दों पर सरकार की चुप्पी सवाल खड़े करती है। उन्होंने कहा कि गोहत्या जैसे संवेदनशील विषय पर सख्त कदम उठाने की जरूरत है, लेकिन इस दिशा में अपेक्षित प्रयास दिखाई नहीं दे रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि संत समाज पर कई बार अनावश्यक दबाव डाला जाता है, जिससे धार्मिक परंपराओं को नुकसान पहुंचता है। देवेंद्र पांडेय ने दावा किया कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती हमेशा से धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए आवाज उठाते रहे हैं और भविष्य में भी यह अभियान जारी रहेगा। उनका कहना है कि सनातन धर्म केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक पहचान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए इसके संरक्षण के लिए समाज के हर वर्ग को आगे आना चाहिए।

सनातन परंपराओं की रक्षा को लेकर अभियान

देवेंद्र पांडेय ने बताया कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती लंबे समय से कई धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों को लेकर सक्रिय रहे हैं। उन्होंने गंगा नदी के अविरल और निर्मल प्रवाह को बनाए रखने के लिए कई आंदोलनों में भाग लिया है। इसके अलावा रामसेतु की सुरक्षा, मंदिरों और मठों के संरक्षण तथा धार्मिक परंपराओं के सम्मान के लिए भी उन्होंने लगातार आवाज उठाई है। देवेंद्र पांडेय के अनुसार कई बार इन आंदोलनों के दौरान संतों को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, यहां तक कि लाठीचार्ज जैसी घटनाएं भी हुईं। लेकिन इसके बावजूद शंकराचार्य और उनके समर्थकों ने अपने अभियान को जारी रखा। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें उन लोगों और संस्थाओं के खिलाफ आवाज उठाई जा रही है जो भगवा वस्त्र धारण करके सनातन धर्म को नुकसान पहुंचाने का काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस अभियान के तहत प्रमाणों के आधार पर सच्चाई सामने लाई जाएगी ताकि समाज को यह पता चल सके कि कौन वास्तव में धर्म की सेवा कर रहा है और कौन उसका दुरुपयोग कर रहा है।

लखनऊ कार्यक्रम में होगा बड़ा संदेश

देवेंद्र पांडेय ने बताया कि 11 मार्च को लखनऊ में होने वाला कार्यक्रम इसी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस आयोजन में संत समाज के सामने यह विषय रखा जाएगा कि सनातन परंपरा में सच्चे संत की पहचान क्या होती है और समाज को किन लोगों से सावधान रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी कहा था कि ऋषि-मुनियों के वेश में कुछ “कालनेमि” जैसे लोग समाज में भ्रम फैला रहे हैं। ऐसे में यह कार्यक्रम समाज को जागरूक करने की दिशा में एक प्रयास होगा। देवेंद्र पांडेय ने बताया कि इसी उद्देश्य से वे अयोध्या पहुंचे हैं और यहां के संत समाज से इस अभियान में सहयोग करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि अयोध्या देश की आस्था का केंद्र है और यहां के संतों का समर्थन इस अभियान को नई दिशा दे सकता है। उनका मानना है कि जब संत समाज एकजुट होकर समाज को सही मार्ग दिखाएगा, तभी सनातन धर्म की परंपराओं को मजबूत किया जा सकेगा। आने वाले दिनों में इस कार्यक्रम को लेकर संत समाज और धार्मिक संगठनों में चर्चा तेज होने की संभावना है।

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