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बुर्के में कांवड़ लेकर हरिद्वार से पहुंचीं 3 मुस्लिम महिलाएं, फिर शिवरात्रि पर ऐसा क्या किया सब रह गए हैरान

गाजियाबाद के डासना में हरिद्वार से बुर्के में कांवड़ लेकर पहुंचीं तीन मुस्लिम महिलाओं ने शिवरात्रि पर सनातन धर्म अपनाने का ऐलान किया। तमन्ना मलिक बनीं गायत्री त्यागी।

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हरिद्वार से बुर्का पहनकर कांवड़ लेकर गाजियाबाद पहुंचीं तीन मुस्लिम महिलाओं ने मंगलवार को शिवरात्रि के मौके पर सनातन धर्म अपनाने का ऐलान किया। यह मामला डासना स्थित शिवशक्ति धाम का है। यहां धार्मिक अनुष्ठान और रुद्राभिषेक के बाद तमन्ना मलिक, अनिशा बानो और रिजवाना ने इस्लाम छोड़कर सनातन धर्म स्वीकार करने की बात कही। इस दौरान मंदिर के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरि महाराज समेत कई संत और श्रद्धालु मौजूद रहे।

हवन-यज्ञ के बाद सनातन धर्म अपनाने का ऐलान

तीनों महिलाएं सोमवार को हरिद्वार से कांवड़ लेकर गाजियाबाद पहुंची थीं। मंगलवार को शिवरात्रि के दिन वे डासना के शिवशक्ति धाम पहुंचीं। यहां हवन-यज्ञ और रुद्राभिषेक समेत धार्मिक अनुष्ठान किए गए। इसके बाद तीनों महिलाओं ने सनातन धर्म के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। तमन्ना मलिक ने अपना नया नाम गायत्री त्यागी रखने की घोषणा की। वहीं अनिशा और रिजवाना ने अपने नाम में से ‘बानो’ शब्द हटाने की बात कही। मंदिर परिसर में मौजूद लोगों ने धार्मिक अनुष्ठान के बाद उनका स्वागत किया।

पहले भी बुर्के में कांवड़ ला चुकी हैं तमन्ना

तमन्ना मलिक इससे पहले भी बुर्का पहनकर हरिद्वार से कांवड़ ला चुकी हैं। फाल्गुन मास की कांवड़ यात्रा के दौरान उन्होंने करीब पांच दिन पैदल चलकर गंगाजल संभल के नैमिषारण्य प्राचीन तीर्थ मंदिर तक पहुंचाया था। वहां महाशिवरात्रि के अवसर पर उन्होंने भगवान शिव का गंगाजल से अभिषेक किया था। उस समय भी उनकी कांवड़ यात्रा चर्चा में आई थी। इस बार हरिद्वार से गाजियाबाद तक कांवड़ लेकर पहुंचने के बाद उनके धर्म परिवर्तन के ऐलान ने मामले को फिर सुर्खियों में ला दिया।

महिलाओं ने बताई धर्म परिवर्तन की वजह

सनातन धर्म अपनाने वाली महिलाओं ने दावा किया कि उन्हें सनातन धर्म में महिलाओं के लिए अधिक सम्मान और आजादी महसूस होती है। अनिशा ने अपने निजी जीवन से जुड़ी परेशानियों का भी जिक्र किया। उनका कहना है कि वह तीन तलाक से पीड़ित रह चुकी हैं और फिलहाल बच्चों की कस्टडी को लेकर पति के साथ विवाद चल रहा है। बच्चों को वापस पाने के लिए उन्होंने भगवान शिव से मन्नत मांगी है। वहीं महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरि महाराज ने कहा कि धर्म परिवर्तन का फैसला लेने वालों को अपनी बात सार्वजनिक रूप से रखने का साहस दिखाना चाहिए। कार्यक्रम में कई संत और श्रद्धालु भी मौजूद रहे।

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