Monday, February 23, 2026
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22 लाख का वाकया बिजली बिल… बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट रहे अलंकार अग्निहोत्री के आवास आरसी पहुंचते ही मचा हड़कंप

बरेली में पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के आवास पर 22 लाख से अधिक बिजली बिल बकाया दिखाकर आरसी जारी होने से प्रशासन में हड़कंप मच गया। कलेक्ट्रेट पहुंचते ही फाइल गोपनीय रखने के निर्देश दिए गए। पढ़ें पूरी खबर।

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उत्तर प्रदेश के बरेली में प्रशासनिक हलकों में उस समय सनसनी फैल गई जब एडीएम कंपाउंड स्थित सिटी मजिस्ट्रेट आवास पर 22 लाख रुपये से अधिक का बिजली बिल बकाया दिखाते हुए रिकवरी सर्टिफिकेट (आरसी) जारी कर दी गई। जिस आवास को लेकर यह कार्रवाई हुई, उसमें पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री रहा करते थे, जिन्होंने कुछ समय पहले अपने पद और सेवा से त्यागपत्र दे दिया था। बिजली विभाग के कॉमर्शियल-2 वर्टिकल कार्यालय से जारी इस आरसी में 22 लाख 73 हजार 932 रुपये की बकाया राशि दर्शाई गई थी। जैसे ही यह मांगपत्र कलेक्ट्रेट पहुंचा, अधिकारियों के बीच खलबली मच गई। सवाल उठने लगे कि आखिर इतने बड़े बकाये की जानकारी पहले क्यों सामने नहीं आई और सरकारी आवास पर सीधे आरसी कैसे जारी कर दी गई।

कलेक्ट्रेट पहुंचते ही फाइल गोपनीय रखने के निर्देश

सूत्रों के अनुसार, रामपुर बाग स्थित बिजली विभाग के वाणिज्यक वर्टिकल द्वितीय कार्यालय से यह आरसी वसूली के लिए प्रशासन को भेजी गई थी। कलेक्ट्रेट में दस्तावेज पहुंचते ही उच्चाधिकारियों ने इस पर कड़ी नाराजगी जताई। बताया जा रहा है कि मामले को सार्वजनिक होने से रोकने के लिए जिला संग्रह कार्यालय से लेकर तहसील सदर तक फाइल को गोपनीय रखने के निर्देश दे दिए गए। प्रशासनिक अधिकारियों का मानना था कि इस तरह की कार्रवाई से सरकार और विभाग की छवि पर असर पड़ सकता है। वहीं, अंदरखाने यह भी चर्चा रही कि यदि यह मामला सार्वजनिक होता है तो विपक्ष और अन्य संगठनों को सरकार पर सवाल उठाने का मौका मिल सकता है। इसलिए फाइल को सीमित दायरे में रखकर स्थिति संभालने की कोशिश की गई।

नियमों पर उठे सवाल, बैकफुट पर आया बिजली विभाग

मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब प्रशासनिक स्तर पर आपत्ति दर्ज कराई गई। विभागीय नियमों के मुताबिक किसी सरकारी अधिकारी या सरकारी आवास पर यदि कोई बकाया होता है तो सीधे आरसी जारी करने से पहले आंतरिक समन्वय और जांच की प्रक्रिया अपनाई जाती है। ऐसे मामलों में सामान्यत: संबंधित विभाग से पत्राचार कर स्थिति स्पष्ट की जाती है। लेकिन यहां सीधे 22 लाख से अधिक की आरसी जारी कर दी गई। प्रशासन की नाराजगी के बाद अधिशासी अभियंता सूर्य कुमार ने आरसी वापस लेने के लिए पत्र लिख दिया। इससे यह साफ हुआ कि विभाग भी अपनी कार्रवाई को लेकर असहज था। फिलहाल बिजली विभाग के अधिकारी बैकफुट पर हैं और पूरे प्रकरण की आंतरिक समीक्षा की बात कही जा रही है।

समर्थकों की लामबंदी और सियासी सरगर्मी तेज

पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के समर्थक भी इस मामले में सक्रिय होते दिख रहे हैं। उनका कहना है कि बिना पूरी जांच के इतनी बड़ी राशि का बकाया दिखाना और आरसी जारी करना जल्दबाजी और लापरवाही का परिणाम है। कुछ लोग इसे प्रशासनिक गलती मान रहे हैं तो कुछ इसे विभागीय मनमानी बता रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने बरेली में एक बार फिर प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या वाकई 22 लाख रुपये का बिल बकाया था या यह किसी तकनीकी त्रुटि का परिणाम है, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। फिलहाल, आरसी वापस लेने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन इस घटना ने यह जरूर दिखा दिया है कि विभागों के बीच तालमेल की कमी किस तरह बड़े विवाद को जन्म दे सकती है। आने वाले दिनों में यह मामला और क्या मोड़ लेगा, इस पर सबकी नजर बनी हुई है।

 

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