प्रयागराज स्थित इलाहाबाद हाईकोर्ट से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के लिए बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। नाबालिग बटुकों के यौन शोषण के कथित आरोपों में घिरे शंकराचार्य को अदालत ने फिलहाल ‘अभयदान’ दे दिया है। जस्टिस जे.के. सिन्हा की बेंच ने आज लंबी सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अदालत ने स्पष्ट किया है कि जब तक इस मामले में अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक शंकराचार्य की गिरफ्तारी नहीं की जाएगी। इस आदेश ने होली की छुट्टियों से ठीक पहले शंकराचार्य और उनके लाखों समर्थकों को बड़ी मानसिक राहत दी है।
मार्च के तीसरे हफ्ते में आएगा फैसला: क्या है कोर्ट की मंशा?
कोर्ट के चैंबर में हुई लगभग सवा घंटे की बहस के बाद यह तय हुआ कि इस मामले में अभी और कानूनी पहलुओं को परखना बाकी है। अदालत ने घोषणा की है कि इस याचिका पर अंतिम फैसला मार्च के तीसरे हफ्ते में सुनाया जाएगा। चूंकि कल से 9 मार्च तक होली का लंबा अवकाश है, इसलिए कोर्ट ने यह सुनिश्चित किया कि इस दौरान पुलिस कोई ऐसी कार्रवाई न करे जिससे न्याय प्रक्रिया बाधित हो। कानून के जानकारों का मानना है कि कोर्ट ने शंकराचार्य को अपना पक्ष रखने और जांच में सहयोग करने का पूरा मौका दिया है, जिससे फिलहाल जेल जाने का खतरा टल गया है।
चैंबर के भीतर की तीखी बहस: सरकारी पक्ष की दलीलों पर पड़ा भारी ‘राहत’ का पलड़ा
आज की सुनवाई सामान्य नहीं थी। जज के चैंबर के अंदर सरकारी वकीलों ने एफआईआर की धाराओं और पॉक्सो (POCSO) एक्ट का हवाला देते हुए गिरफ्तारी की पुरजोर मांग की थी। सरकारी पक्ष का तर्क था कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हिरासत में पूछताछ जरूरी है। वहीं, शंकराचार्य के वकीलों ने इसे एक गहरा षड्यंत्र बताया। बचाव पक्ष ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि स्वामी जी कहीं भाग नहीं रहे हैं और वे हर तरह की जांच के लिए तैयार हैं। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद बीच का रास्ता निकाला और फैसले को सुरक्षित रखते हुए अंतरिम सुरक्षा प्रदान कर दी।
होली का जश्न अब मठ में: समर्थकों में खुशी की लहर
इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद वाराणसी और ज्योतिर्मठ के समर्थकों में खुशी का माहौल है। अगर आज कोर्ट गिरफ्तारी पर रोक नहीं लगाता, तो पुलिस छुट्टियों के दौरान कड़ी कार्रवाई कर सकती थी। अब यह साफ हो गया है कि शंकराचार्य की होली अपने अनुयायियों के बीच मठ में ही मनेगी। हालांकि, मार्च के तीसरे हफ्ते तक सस्पेंस अभी खत्म नहीं हुआ है, लेकिन तत्कालीन तौर पर पुलिस के हाथ बंध गए हैं। अब सबकी नजरें मार्च के उस फैसले पर होंगी जो यह तय करेगा कि आगे की कानूनी लड़ाई किस दिशा में जाएगी।
