उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के गंभीरपुरा मोहल्ले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने हर किसी का दिल छू लिया। सावन के पवित्र महीने में जहां बड़े-बड़े कांवड़िये लंबी यात्राएं करते नजर आते हैं, वहीं इस बार एक 9 साल की नन्ही बच्ची कांवड़ उठाकर भगवान शिव के दरबार में पहुंची। उसके चेहरे पर मासूमियत थी, आंखों में उम्मीद और दिल में एक ही दुआ। मंदिर परिसर में जब उसने हाथ जोड़कर प्रार्थना की तो आसपास मौजूद लोग भी भावुक हो गए। बच्ची ने धीमी आवाज में कहा— “भोलेनाथ, मेरे पापा की दारू छुड़ा दो।” यह शब्द सुनते ही माहौल में सन्नाटा छा गया। उसकी यह दुआ किसी निजी इच्छा के लिए नहीं थी, बल्कि अपने परिवार की खुशहाली के लिए थी।
पिता की शराब की लत से परेशान है मासूम
दिल्ली से अपने नाना-नानी के घर अलीगढ़ आई यह बच्ची पिछले कुछ समय से अपने पिता की शराब की आदत से बेहद परेशान है। परिवार के लोगों के मुताबिक, पिता के शराब पीकर घर आने और झगड़ा करने की घटनाओं ने बच्ची के मन पर गहरा असर डाला है। कई बार घर में हुए विवादों को उसने अपनी आंखों से देखा है। हर बार उसका बचपन सहम जाता था। उसे न तो महंगे खिलौनों की चाह है और न ही नए कपड़ों की। उसकी सबसे बड़ी ख्वाहिश है कि उसके घर में शांति लौट आए। यही वजह है कि सावन के महीने में उसने कांवड़ यात्रा का संकल्प लिया। परिवार के लोगों ने पहले इसे मासूम जिद समझा, लेकिन जब उसने बार-बार यही कहा कि वह भोलेनाथ से अपने पापा के लिए दुआ मांगेगी, तब सबको उसकी भावना की गहराई समझ आई।
मौसी ने बताया— कई दिनों से कर रही थी जिद
बच्ची की मौसी कुमकुम ने बताया कि वह कई दिनों से भगवान शिव के मंदिर जाने और कांवड़ उठाने की बात कर रही थी। उसने साफ कहा था कि वह अपने पिता की शराब की लत छुड़वाने के लिए प्रार्थना करेगी। परिवार ने उसे समझाया भी कि वह अभी छोटी है, लेकिन उसका विश्वास अडिग था। कांवड़ लेकर चलते समय उसके चेहरे पर थकान कम और उम्मीद ज्यादा दिखाई दे रही थी। मंदिर पहुंचकर उसने पूरे मन से पूजा की और हाथ जोड़कर भोलेनाथ से विनती की कि उसके पापा शराब छोड़ दें। आसपास खड़े श्रद्धालुओं की आंखें भी नम हो गईं। कई लोगों ने बच्ची को आशीर्वाद दिया और कहा कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना जरूर सुनी जाती है। बच्ची ने भी भरोसे से कहा कि उसे यकीन है, भगवान उसकी बात जरूर सुनेंगे।
एक मासूम दुआ ने दिया बड़ा संदेश
यह घटना सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि उन हजारों परिवारों की हकीकत को सामने लाती है जो शराब की लत के कारण टूटने की कगार पर पहुंच जाते हैं। अक्सर ऐसे मामले आंकड़ों और खबरों में सीमित रह जाते हैं, लेकिन इस 9 साल की बच्ची ने अपने साहस और विश्वास से सबको सोचने पर मजबूर कर दिया। उसकी कांवड़ यात्रा ने यह संदेश दिया कि जब घर का माहौल बिगड़ता है तो उसका असर सबसे ज्यादा बच्चों पर पड़ता है। समाज के लिए यह एक आईना भी है कि शराब की लत सिर्फ व्यक्ति को ही नहीं, पूरे परिवार को प्रभावित करती है। इस नन्ही कांवड़िया की सच्ची प्रार्थना ने यह साबित कर दिया कि सबसे पवित्र दुआ वही होती है जो एक मासूम दिल से निकलती है। अब सभी को इंतजार है कि उसकी यह प्रार्थना कब पूरी होती है और उसके घर में फिर से खुशियां लौटती हैं।

