कभी सड़कों के किनारे मिठाई की दुकान लगाते थे करण जोहर के पिता, इस एक्ट्रेस ने चमका दी किस्मत

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आज 6 सितंबर है। आज का दिन पूरे फिल्मी कुनबे के लिए काफी मायने रखता है, और इसके साथ ही उन सभी लोगों के लिए भी, जो संघर्ष करते हैं। कभी हार नहीं मानते। अपनी सकारात्कम सोच के साथ अपनी मंजिल को किसी भी कीमत पर पाकर ही रहते हैं। आज हम आपको एक ऐसे ही नायाब शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसने अपनी काबिलियत, मेहनत, जज्बा, प्रतिभा के दम पर आकर्षण और प्रतिस्पर्धा से भरी इस फिल्मों कुनबे में अपना नाम सर्वविख्यात किया। ये भी पढ़े :करण जौहर के धर्मा प्रोडक्शन हाउस में लगी भीषण आग, भारी नुकसान की आशंका

हम बात करे हैं, फिल्म निर्माता करण जोहर के पिता यश जोहर की। कहते हैं कि किसी को कुछ बतौर विरासत मिल जाती है तो किसी को अपनी मेहनत के दम पर उस मकाम को हासिल करना होता है, जिसको पाने की ख्वाहिश कर कोई करता है, तो यश जोहर उन लोगों में से थे, जिन्होंने अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर फिल्मी दुनिया में एक नया मकाम हासिल किया था।

यश जोहर का जन्म 6 सितंबर 1929 को लाहौर में हुआ था। यश अपने सभी भाई बहनों में सबसे ज्यादा पढ़े लिखे थें, इसलिए घर परिवार की अहम जिम्मेदारी उनके पिता उन्हें ही दिया करते थे। हालांकि, गुजरते वक्त के साथ यश के पिताजी ने मिठाई की एक दुकान खोली, जिसका नाम था नानकिंग और उस दुकान पर यश ही बैठा करते थे। उनका पिता का कहना था कि यश अपने सभी भाइयों-बहनों में सबसे ज्यादा पढ़ा लिखा है तो वो दुकान को काफी अच्छे से चला लेगा। इसलिए वो दुकान पर हमेशा रहते थे, लेकिन उन्हें ये काम बिल्कुल भी पसंद नहीं था। बस, मजबूरी बस वो ऐसा किया करते थे।

कुछ ऐसे ही कट रही थी इनकी जिन्दगी की इनका मां ने कहा कि तुम मुंबई चले जाओ। तुम कुछ बड़ा करने के लिए बने हो, न की मिठाई की दुकान पर बैठने के लिए। यश की मां ने अपनी जेवरात गहने कुछ पैसों का जुगाड़ कर यश को मुंबई भेज दिया। फिर इसके बाद मुंबई में यश के जीवन में एक नया पड़ाव आया।

मुंबई में आने के बाद यश ‘दा टाइम्स ऑफ इंडिया’ में फोटोग्राफर बनने की होड़ में लग गए। पढ़े लिखे तो थें ही, उन दिनों में वो अंग्रेजी भी काफी अच्छी-खासी बोला करते थे, तो हुआ कुछ ऐसा की उन दौरान डायरेक्टर के आसिफ मुगल-
ए-आज़म की शूटिंग कर रहे थे। उस दौरान ही यश ने मधुबाला की फोटो की खींची थी।

ऐसा कहा जाता है कि मधुबाला किसी को फोटो नहीं खींचने देती थीं, लेकिन यश उन दिनों काफी अच्छी अंग्रेजी बोला करते थें। बस, फिर क्या! उनकी अंग्रेजी से मधुबाला इतनी इम्प्रेश हो गई की यश की फोटो खींचने की इजाजत दे दी। यश से मधुबाला इतनी इम्प्रेश हो चुकी थीं कि वो उन्हें गार्डन में घुमाने भी ले गई। फिर क्या था ? बस ! एक पल में ही बदल गई किस्मत यश जोहर की। अगले दिन ही उन्हें नौकरी मिल गई।

इसके  बाद यश के जीवन में नया आयाम तब आया जब उन्होंने बतौर निर्माता अपनी फिल्म अमिताभ बच्चन और शत्रुघ्न सिन्हा के दोस्ताना बनाई थी। ये फिल्म हिट गई थी। इसके बाद उन्होंने कई फिल्मों को प्रोड्यूस किया। लेकिन, अफसोस उनकी फिल्मे कुछ ज्यादा नहीं चली। वे पूजा-पाठ भी खूब किया करते थें, जिसकी झलक हमें उनकी फिल्मों में देखने को खूब मिलती है। अमूमन, उनकी फिल्मे विदेशों में ही शूट हुआ करती थी।

देवानंद के साथ उन्होंने कई फिल्में की जैसे गाईड, हरे रामा हरे कृष्णा, प्रेम पुजारी जैसी कई शानदार फिल्मे की। इसके बाद 1970 में उन्होंने धर्मा प्रोड्क्शन शुरू किया, जिसमें उन्होंने कई फिल्मे बनाई। अब उनके बेटे करण जोहर फिल्मे बनाते हैं। ये भी पढ़े :रानू मंडल चाहती हैं उनकी जिंदगी पर बने फिल्म, तो बेटी ने सुनाया अपना दर्द

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