Monday, January 25, 2021
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बिना दिल के ही जी रही है यह महिला, आधुनिक डिवाइस बना साथी

दिल्ली। जिन्दगी जीने के लिए जज्बा चाहिए। विज्ञान और चिकित्सा ने ऐसे लोगों की जिन्दगी को बचाया है जो आश्चर्य है। लंदन में रहने वाली एक महिला की जिंदादिली की दुनियाभर में चर्चा हो रही है। वह अपने हृदय को साथ लेकर घुमती हैं। ईस्ट लंदन निवासी सलवा हुसैन मुल्क की अकेली महिला हैं जिनके शरीर में दिल नहीं है। सलवा का दिल उनकी पीठ पर लगे बैग में है। इस स्थिति को लेकर उनका परिवार हमेशा फिक्रमंद रहता है लेकिन मन से मजबूत सलवा हमेशा खुशहाल दिखती हैं। जरा सोचिए कि तकनीकी दिल से जिन्दगी कितना कठिन है। सलवा को कुछ समय पहले हार्ट अटैक पड़ा उस वक्त वो घर में अकेली थीं। उन्होंने हिम्मत जुटाई और खुद ड्राइव कर पड़ोस में रहने वाले फेमिली डॉक्टर के पास पहुंचीं। इसके बाद उनकी कहानी दुनिया के लिए मिसाल बन गयी। हर्ट अटैक के बाद स्वयं गाड़ी चलाकर डाॅक्टर के पास पहुंचना कितना आश्चर्यजनक है। सलवा ने ऐसा कर दिखाया। डाॅक्टर ने उनके जज्बे के अनुसार ही कोशिश किया। सलवा हुसैन का लंदन में हार्ट ट्रांसप्लांट होना था लेकिन खराब तबीयत की वजह से ऐसा नहीं हो सका। उनको हर्ट ट्रांसप्लांट नहीं होने की स्थिति में एक आधुनिक डिवाइस पर रखा गया। सलवा को नई जिंदगी देने वाली इस अत्याधुनिक डिवाइस में दो बैटरी हैं जिसका वजन करीब 7 किलो है।

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सलाव दो बैटरी के साथ हमेशा रहती हैं। उनके साथ सात किलोग्राम को बैग उनकी जिन्दगी है। इस बैग के साथ ही उनकी सांसे चलती हैं। चिकित्सा विज्ञान भी जिन्दगी बचाने में आगे है। कृत्रिम दिल का काम करने वाली डिवाइस में एक इलेक्ट्रिक मोटर और पंप है। मोटर और पंप जो बैटरी की मदद से उनके शरीर में रक्त परिसंचरण के लिए अटैच्ड ट्यूब के माध्यम से सीने में एक प्लास्टिक बैग में हवा को धकेलती है। यह प्रक्रिया दिल के अनुसार ही काम करता है। शरीर को रक्त, आक्सीजन हमेशा, मात्रानुसार उपलब्ध रहता है। सलावा का पांच साल का एक बेटा है और 18 महीने एक बेटी है।

सलवा कहती हैं कि मैं दिल की सर्जरी होने से पहले और उसके बाद काफी बीमार थी। मुझे ठीक होने में लंबा वक्त लगा है। सलवा की कहानी और जज्बे को सोशल मीडिया पर काफी तरजीह दी जा रही है। डिवाइस की वजह से सलवा की जान बची हुई है। डिवाइस की एक कमजोर कड़ी भी है। लंदन में हुई सर्जरी में डिवाइस की बैटरी खत्म होने के बाद उसे बदलने के लिए सिर्फ 90 सेकंड का समय होता है। जिन्दगी बचाने के लिए यह काम 90 सेकंड में करना होगा।

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