गरीबी के विरुद्ध इस लड़के ने खोला मोर्चा, पिता की इस बात को सीरियस में ले गया बेटा, और फिर बना IAS अफसर

173

न जाने कितनी ही ऐसी कहानियां आपने पढ़ी होगी, जब एक शख्स विपरीत परिस्थितियों का सामना करते हुए यूपीएससी की परीक्षा को पास करता है। जिसे प्रशासनिक अधिकारी के नाम से जानते है। इसका रूतबा और इसकी शोहरत को देख हर किसी का मन ललचाता है, मगर यहां तक पहुंचने की राह इतनी आसान नहीं बताई जाती है, मगर ऐसे नायकों की फेहरिस्त भी काफी लंबी है, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों का सामना करते हुए इस रूतबे को इस शोहरत को और इस माान सम्मान को हासिल किया है। आज हम आपको अपनी  इस खास पेशकश में एक ऐसी ही कहानी के बारे में बताने जा रहे हैं, जब इनके पिताजी ने मजाक में ही कह दिया था बन जाओ कलेक्टर और इन्होंने इस बात को सीरियस में ले लिया और फिर बने गए, जो कभी इनके पिताजी ने कभी मजाक में ही कहा था।

ये भी पढ़े :केबीसी सीजन-11 में बिहार का ये लाल बना पहला करोड़पति, आईएएस बनकर करना चाहता है समाज की सेवा

आज हम आपको बताने जा रहे हैं एक गरीब परिवार में जन्मे शुभम की कहानी के बारे में। शुभम की प्रारंभिक शिक्षा राजस्थान की राजधानी जयपुर से मुकम्मल हुई। हलांकि  इनके पिताजी को काम की तलाश में महाराष्ट्र  जाना पड़ा। अपने परिवार में तीनों भाई बहनों में सबसे छोटे शुभम थे और उनकी बहन भाग्य श्री का स्कूल भी काफी दूर था। आप शुभम के संघर्ष का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि ये रोज सुबह स्कूल जाने के लिए ट्रेन पकड़ते और शाम तीन बजे वापस घर लौटते थे। वहीं शुभम के पिताजी अपने परिवार का गुजर बसर करने के लिए महाराष्ट्र की सड़कों पर रहने लगे और वहां पर उन्होंने दुकान शुरू कर दी।

वहीं शुभम के भाई घर से दूर जाकर आईआईटी की तैयार कर रहे थे, इसलिए घर की सारी जिम्मेदारी इन्हें उठानी चाहिए। लिहाजा इन्होंने पिताजी की मदद करने का फैसला किया। इसलिए स्कूल से आते ही सीधा अपनी पिताजी की दुकान पर पहुंच जाते थे और वहां पर मौका निकालकर पढ़ाई भी करते थे। आपको यह जानकर हैरत हो सकती है कि इन्होंने 8 कक्षा से लेकर 12 वीं तक ऐसा ही जीवना जीया, जिसके चलते इनके कोई दोस्त भी नहीं बन पाए और ये कोई खेल भी नहीं खेल पाए, चूंकि उन्हें यह सब करने के लिए कभी समय ही नहीं मिला।

वहीं जब शुभम 10 कक्षा में पहुंचे तो उनके काफी अच्छे अंके आए थे। लोगों ने सुझाव दिया कि साइंस ले, मगर उनकी रूची कॉमर्स में थी। इसके बाद उन्होंने 12वीं कक्षा में काफी  अच्छे अंक प्राप्त किए थे। इसके बाद वे दिल्ली के एसआरसीसी कॉलेज में एडमिशन लेना चाहते थे, मगर किसी कारणवश इनका एडमिशन नहीं हो पाया। इसके बाद ये हताश हो गए, मगर इनके भाई ने इन्हें समझाया कि जिस कॉलेज में एडमिशन मिल रहा है। उसमें ले लो। उन्होंने फिर वैसा ही किया, जिस कॉलेज में एडमिशन मिल रहा था, उसमें एडमिशन ले लिया। इसके बाद इन्होंने बीकॉम किया करने के एमकॉम भी किया। इसके बाद इन्होंने सीवील सर्विस की परीक्षा में जाने का मन बनाया। हर पिता की तरह शुभम के पिता का भी सपना था कि उनका बेटा बड़ा अफसर बने, इसलिए एक दिन शुभम के पिता ने उनसे मजाक में ही कह दिया कि कलेक्टर बन जाओ  और फिर क्याा हुआ शुभम ने अपने आपको यूं समझिए पढ़ाई में झोंक दिया।

इतनी आसान नहीं थी राह 
कई मर्तबा विफल होने के बावजूद भी शुभम ने हार नहीं मानी। सबसे पहले 2015 में परीक्षा दी थी, तब वे प्री भी नहीं निकाल पाए थे। मगर दूसरे रेंक उनका चयन हो गया, मगर उनकी रैंक आई 366, जिसके अंतर्गत मिलने वाली पोस्ट से वे संतुष्ट नहीं दिखे। इसके बाद उन्होंने 2017 में परीक्षा दी। इस बार भी उनका चयन नहीं हुआ। इतनी बार असफल होने के बावजूद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और फिर उन्होंने चौथी बार पूरी मेहनत से परीक्षा दी और फिर रेंक मिली उन्हें चौथी। कभी अपनी असफलता से तो कभी अपनी मेहनत से आखिरकार शुभम ने अपने सपने पूरा करके की दम लिया।

ये भी पढ़े :UPSC Result 2018: पंजाब की बेटी ने रोशन किया नाम, कैंसर से जूझ रहे थे पिता, बेटी ने पास की आईएएस परीक्षा