Saturday, January 16, 2021

रात के अंधेरे में होता है किन्नरों का अंतिम संस्कार, जानिए क्यों पीटते हैं शव को जूते चप्पलों से

आप सभी ऐसा मानते होंगे कि किन्नरों की दुआ में बहुत ताकत होती है। घर में कोई शुभ काम हो या बच्चे का जन्म हुआ हो, किन्नर दुआ देने जरूर आते हैं। मगर किन्नरों की जिंदगी जन्म से लेकर मौत तक, बहुत दर्दनाक होती है जिसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते हैं। क्या आपको पता है कि किन्नरों का अंतिम संस्कार रात में किया जाता है और केवल यही नहीं, उनके शव को जूते-चप्पलों से बहुत मारा भी जाता है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं किन्नरों के अंतिम संस्कार (Kinnar Dead Body Cremation) से जुडी उन बातों के बारे में जो शायद ही आप जानते होंगे।

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Painful journey of third gender ऐसा माना जाता है किन्नरों की छठी इंद्रीय बहुत तेज होती है। इन लोगों को आगे होने वाली घटनाओं का आभास हो जाता है।

Prior Felings of Deathकहा जाता है कि किन्नरों को पहले ही मालूम हो जाता है कि उनकी मौत होने वाली है। इस बात के कई प्रमाण दुनियाभर से मिल चुके हैं।

Feelings of Eunuchजब किसी किन्नर की मौत होने वाली होती है तो उनके साथ अजीब व्यवहार शुरू कर दिया जाता है। वे कहीं आना-जाना और खाना बंद कर देते हैं। इस वक्त में वे सिर्फ पानी पीते हैं। साथ ही प्रार्थना करते हैं कि वे अगले जन्म में किन्नर न बनें।

Soul liberation processकिन्नरों के शव को दफनाया जाता है मगर उससे पहले आत्‍मा को आजाद करने की प्रक्रिया (Soul Liberation Process) की जाती है। शव को सफेद कपड़े में लपेटा जाता है मगर शव पर कुछ नहीं बांधा जाता।

Kinnar Funeral At Nightये प्रयास रहता है कि मृत किन्नर के शव को समुदाय के बाहर का व्यक्ति न देख पाए। वे मानते हैं कि यदि किन्‍नर के शरीर को किसी आम जन ने देखा तो वो दिवंगत किन्नर फिर से किन्‍नर योनि में ही जन्म लेगा। इसी कारण से इनके अंतिम संस्कार के सभी रिवाज रात में ही पूरे किए जाते हैं।

Dead bodies beaten with shoes and slippersहैरान कारण वाली बात यह है कि किन्नर समुदाय के लोग शव यात्रा निकालने से पहले शव को जूते-चप्‍पलों से पीटते हैं। इसका कारण है कि अगले जन्म में वह फिर से किन्नर न बने।

Never Cry After A Transgender Diesकिन्नर की मौत के बाद किन्नर समाज उसका कभी मातम नहीं मनाता क्योंकि कहा जाता है कि मृतक किन्नर को नरकीय जीवन से मुक्ति मिल गई है। किन्नर बहुचरा माता की पूजा करते हैं और प्रार्थना करते हैं कि अगले जन्म में वे किन्नर के रूप में न जन्म न लें।

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