वैज्ञानिकों को मिली इस बड़ी सफलता से कोरोना मरीजों के बीच खुशी की लहर, ये है बड़ी वजह 

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एक तरफ खौफ कोरोना का तो दूसरी तरफ रौब मौत के तांडव का। ऐसे में वैज्ञानिकों और चिकित्सकर्मियों का किरदार अहम हो जाता है। चिकित्सकर्मी जहां मरीजों की जान बचाने में जुटे हैं तो वहीं वैज्ञानिक चिकित्सकर्मियों को रास्ता सुझाने की दिशा में अनवरत खोज में जुटे हैं। इस बीच वैज्ञानिकों के हाथ कई ऐसी जानकारियां लग रही है, जो कि चिकित्सकर्मी के लिए कोरोना मरीजों को बेहतर उपचार मुहैया कराने की दिशा में एक अहम औजार साबित हो सकते हैं। अब इस बीच खबर है कि वैज्ञानिक अब तमाम ठिकानों का पता लगा चुके हैं, जहां से आहिस्ता-आहिस्ता कोरोना अपनी पैठ बनाकर इंसान को अपनी गिरफ्त में लेने का काम करते हैं।

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बता दें कि हालिया शोध में वैज्ञानिकों ने खुलासा किया है कि कोरोना होने के बाद सबसे पहले मरीज को बुखार होता है, इसके बाद खांसी, फिर बुखार, मांसपेशियों में दर्द, मितली, उल्टी और फिर आखिरी में दस्त जैसे लक्षण दिखने लग जाते हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक, कोरोना एक क्रमबद्धता व एक सिलसिले के साथ किसी मरीज को अपनी गिरफ्त में लेने के काम करता है। अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न कैलिफोर्निया (University of Southern California) में मेडिसिन एवं बायोमेडिकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर और अध्ययन के सह-लेखक पीटर कुन (Peter Kuhn) ने कहा कि इस क्रम को समझना तब और आवश्यक हो  जाता है, जब फ्लू जैसे परस्पर रोगों का चक्र चल रहा होता है।

कुन के मुताबिक, अब वैज्ञानिकों के इस खोज के बाद मरीजों को बेहतर उपचार मिल पाएगा। पहले की तुलना में मरीजों को बेहतर उपचार मिलने के आसार जताए जा रहे हैं, चूंकि अब डॉक्टरों को कोरोना वायरस कैसे किसी भी शख्स को अपनी गिरफ्त में लेने का काम करता है.. इसकी क्रमबद्धता को समझने में आसानी होगी, लिहाजा वे फिर मरीजों का बेहतर उपचार कर पाएंगे।

शोधकर्ताओं ने इस शोध को ऐसे तैयार नहीं किया है बल्कि चीन के 55 हजार कोरोना संक्रमण के मामलों का विश्लेषण किया है। इसके बाद इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि एक शख्स को कोरोना एक क्रमबद्धता के तहत अपने गिरफ्त में लेने का काम करते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने यह डाटा 16 से 24 फरवरी के बीच तैयार किया है। चाइना मेडिकल ट्रीटमेंट एक्सपर्ट ग्रुप की तरफ से उपलब्ध कराये गए 11 दिसंबर, 2019 से 29 जनवरी, 2020 के बीच के 1100 मरीजों के डेटा को भी अध्ययन में शामिल किया।

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