गरीबों का मसीहा बना भिखारी, संकट में दिया राशन, बांटे 3000 मास्क, पुलिया का निर्माण से लेकर बच्चों की फीस..

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कोरोना वायरस (corona virus) से इस समय पूरी दुनिया जूझ रही है. भारत में संक्रमण के खतरे को देखते हुए 31 मई तक लॉकडाउन बढ़ाया गया है. जिसकी मार सबसे ज्यादा प्रवासी मजदूरों पर पड़ रही है. जो बेचारे एक वक्त की रोटी के लिए भी मोहताज हो गए हैं. वहीं जो भिखारी चिलचिलाती धूप और कंपकंपाती ठंड में भीख मांगकर अपना और परिवार का पेट भरते हैं अब वही भिखारी संकट की स्थिति में लोगों की मदद कर रहे हैं. जी हां, पंजाब के पठानकोट में ऐसा भिखारी है जो कोरोना योद्धा बनकर मदद कर रहा है. हैरानी वाली बात ये है कि, सड़कों पर भीख मांगने वाला राजू दिव्यांग हैं फिर भी उसने अपनी सारी जमापूंजी को देशसेवा में लगाया हुआ है.

100 परिवारों को राशन, बांट दिए 3000 मास्क
कितनी अजीब बात है न, जिन लोगों के पास धन-दौलत सबकुछ है वो इस समय मदद के लिए आगे नहीं आ रहे और भिखारी राजू ने 100 गरीब परिवारों को 1 महीने का राशन दिया है साथ ही संक्रमण से बचाने के लिए 3000 मास्क बांट चुका है.

भीख के पैसों से गरीब लड़कियों की शादी
कोरोना संकट के समय राजू की दरियादिली की जितनी तारीफ की जाए कम है. पूरे दिन ट्राइसाइकिल पर भीख मांगने वाला राजू अपने भीख के पैसों से लोगों की मदद करता है और 22 गरीब लड़कियों की शादी भी करा चुका है. राजू ने बताया कि, उसे जितने भी पैसे भीख में मिलते हैं उनसे वो अपनी जरूरत पूरी करने के बाद पैसों को जमा कर लेता है और फिर लोगों की मदद करता है.

टूटी पुलिया का कराया निर्माण
जिस राजू की हम बात कर रहे हैं वो राजू दिल से भिखारी नहीं इसलिए उसे भिखारी नाम देना गलत होगा क्योंकि, जिस काम को प्रशासन नहीं करा पाया उस काम को राजू ने कर दिखाया. जिसकी चर्चा पूरे पंजाब में हुई. दरअसल, पठानकोट के ढांगू रोड पर एक गली की तरफ जाने वाली पुलिया टूटी हुई थी.raju pathankot आने-जाने वाले लोगों को हर रोज परेशानी हो रही थी. जब प्रशासन ने लोगों की नहीं सुनी तो राजू ने आगे आकर अपने भीख के पैसों से ही पुलिया को ठीक कर लोगों की परेशानी दूर कर दी. इस काम की सराहना पूरे पंजाब में हुई.

स्कूल की फीस और भंडारा
राजू के कामों की चर्चा जब हर जगह होने लगी तो पता चला कि, वह गरीब बच्चों को पढ़ाई में मदद करने के लिए स्कूल की फीस भरता है. भीषण गर्मी में लोगों के लिए पानी के इंतजाम से लेकर भंडारा कराता है. राजू पर वो बात बिल्कुल फिट बैठती है जिसमें कहा जाता है कि, इंसान अमीर पैसों से नहीं दिल से होता है. अगर दिल अमीर हो तो सब हो जाता है. वरना अच्छे से अच्छे अमीर मदद के लिए आगे नहीं आते.

परिवार ने कर लिया किनारा
नेक दिल और अच्छे विचारों वाला राजू अकेला है. उसके परिवार ने उसे दूर कर दिया शायद इसलिए क्योंकि, वह दिव्यांग है. परिवार से दूर होने का दुख राजू को सताता है. इसलिए वह कहता है कि, मैं भीख के पैसों ही कुछ अच्छे काम कर लूंगा जिससे मेरी अर्थी को कंधा देने वाले लोग मिल जाएंगे. वरना तो एक भिखारी का जीवन जमीन से शुरू होकर जमीन पर खत्म हो जाता है. आखिरी वक्त में 4 लोग तो दूर कफन तक नसीब नहीं होता.

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