Monday, January 25, 2021
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रेप केस में महिला के बयान से संतुष्ट नहीं जज, कहा- भारतीय महिलाएं ऐसा नहीं करतीं

दुष्कर्म जैसी वारदातों को हमारे यहां हैवानी अपराध का नाम दिया जाता है. लेकिन हाल ही में कर्नाटक से ऐसा ही एक रेप से जुड़ा मामला सामने आया है, जिसमें जज को महिला के किसी भी तथ्य से संतुष्टि नहीं है. यहां तक कि सुनवाई के दौरान कोर्ट में जज ने ये कहा है कि रेप के बाद सो जाना भारतीय महिलाओं का आचरण नहीं है. दरअसल महिला की ओर से युवक पर ये आरोप लगाया गया था कि उसने उसे शादी का वादा कर उसके साथ रेप जैसी घटना को अंजाम दिया था. ऐसे में कोर्ट की ओर से रेप के आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई की जा रही थी.

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दरअसल रेप केस को लेकर जब कोर्ट में सुनवाई हुई तो महिला ने अपने बयान में कहा था कि वो रेप के बाद थककर सो गई थी. जिस पर अब जज कृष्णा एस दीक्षित ने आपत्ति जताई है. उन्होंने महिला के बयान पर शंका जताते हुए कोर्ट की तरफ से आरोपी को एक लाख रुपये की जमानत राशि और कुछ शर्तों के आधार पर जेल से शिकायतकर्ता के बयान के बाद उसे आजाद कर दिया है. rapeबता दें कि जज महिला की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं थे कि वो रेप के बाद थककर सो गई थी. ऐसे में केस पर फैसला करते हुए जज ने अपने तर्क में कहा कि ये अनउपयुक्त है और हमारे यहां की महिलाएं रेप होने के बाद इस तरह का व्यवहार नहीं करती हैं.

इतना ही नहीं जमानत का आदेश देते हुए जज ने ये भी कहा कि शिकायतकर्ता महिला अभी तक ये भी बताने में सफल नहीं हो पाई है कि वो कथित वारदात वाले दिन रात में 11 बजे अपने ऑफिस क्या करने गई थी. यहां तक कि जब आरोपी ने उसे शराब पिलाई तो उस दौरान महिला ने उसे मना क्यों नहीं किया.rape बता दें कि इस केस के आरोप को अदालत ने 6 शर्तों के साथ जमानत दी है. ऐसे में यदि एक भी कानून का वो उल्लंघन करता है तो उसे दोबारा सजा हो सकती है. इसके साथ ही आरोपी को महीने के हर दूसरे और चौथे शनिवार को पुलिस स्टेशन आकर रिपोर्ट देने के लिए भी कहा गया है.

फिलहाल जज के इस फैसले के बाद पीड़ित महिला के वकील की ओर से आरोपी के जमानत का विरोध जताया गया है. साथ ही उनका ये कहना है कि आरोपी पर लगाए गए अपराध गंभीर हैं. यहां तक कि जो सबूत पेश किए गए हैं वो सजा के लिए पूरे हैं. rapeऔर तो और वकील ने अपराधी की अग्रिम जमानत को ‘समाज के लिए असुरक्षित’ बताते हुए उसे खारिज करने की भी मांग की. लेकिन वकील के तथ्यों को सुनने के बाद जज ने कहा कि अपराध की ‘गंभीर प्रकृति’ नागरिक को स्वतंत्रता से वंचित करने आधार नहीं हो सकती है. वो भी ऐसे समय में जब पुलिस की ओर से कोई ‘प्रथम दृष्टया’ मामला न बनाया गया हो.

आगे जज ने ये भी कहा कि, ‘शिकायतकर्ता का इस मामले में ये कहना है कि शादी का झूठा वादा कर उसके साथ रेप की घटना को अंजाम दिया गया. लेकिन हालात को देखते हुए इस मामले पर यकीन करना थोड़ा मुश्किल है. इतना ही नहीं आगे ‘जज ने शिकायत करने वाली महिला से इस बारे में भी पूछताछ की कि वो अदालत उस वक्त क्यों नहीं आई जब आरोपी उसे सेक्सुअल फेवर के लिए मजबूर कर रहा था. rapeसाथ ही जज ने कहा कि, ‘अभी तक महिला ये भी स्पष्ट नहीं कर पाई है कि वो रात 11 बजे अपने ऑफिस क्या करने गई थी, उसने याचिकाकर्ता के साथ शराब पीने और सुबह तक साथ रहने पर भी किसी तरह की रोक नहीं लगाई. इसके बाद उसने ये स्पष्टीकरण दिया कि रेप के बाद वो थक कर सो गई थी, लेकिन जब हमारी महिलाओं के साथ रेप जैसी वारदात होती है, तब वो इस तरह की प्रतिक्रिया नहीं देती हैं.’

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