10 सालों के इतंजार और अपनों के प्यार ने ढूंढ निकाला ITBP के लापता जवान को, देखें भावुक तस्वीरें

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इंतजार एक ऐसा शब्द, जो किसी की जिंदगी का हिस्सा बन जाता है तो किसी की परीक्षा लेता है। कई सालों इतंजार करने के बाद एक पत्नी का पति उसकी आंखों के सामने आता है तो वो अपनी किस्मत पर यकीन नहीं कर पाती। बस ये सोचती है कि, शायद उसके सारे व्रत का फल उसे मिल गया हो। पर आंखों से आंसूओं की धारा थमने का नाम लेने नहीं लेती। आज जो हम आपको कहानी बताने जा रहे हैं वो वाकई दिल छूने वाली है। आईटीबीपी का जवान जो पूरे 10 साल से गायब था, जिसके परिवार वाले मन के किसी कोने में ये मान चुके थे कि, अब उनका लाल शायद इस दुनिया में नहीं रहा। वही बेटा जब 10 साल बाद घर लौटा हर किसी की आंखें भर आई। विक्रम का स्वागत पूरे परिवार ने पूजा-अर्चना और मंगल गीत गाकर किया। विक्रम उत्तराखंड के चंपावत जिले के डुंगरासेठी गांव के रहने वाले हैं।

2 फरवरी 2010 को हुई थे लापता
आपको बता दें, विक्रम 2 फरवरी 2010 में लापता हुए थे। उस समय उनकी तैनाती आईटीबीपी कानपुर ने थी। लेकिन, आखिरी बार विक्रम अपने परिवार से 20 दिसंबर 2009 में मिलकर ड्यूटी के लिए निकले थे। हालांकि, 9 साल 11 महीनों का ये इतंजार किसी वनवास से तो कम नहीं लेकिन, विक्रम को देखकर परिवार वालों की खुशी का ठिकाना नहीं है। इस समय विक्रम की उम्र 58 साल हो चुकी है।ITBP Vikram इन 10 सालों में विक्रम और उनकी परिवार ने कई परेशानियां झेली। विक्रम अपने परिवार से दूर भटक रहे थे। तो नहीं उनका परिवार भी उनके बिना अधूरा था। दिल में आस जरूर थी। इस दौरान विक्रम की दोनों बेटियों और बेटे की शादी हो चुकी है जबकि, एक बेटा पढ़ाई कर रहा है। विक्रम के लापता होने के बाद सगे-संबंधियों ने उनके परिवार को संभाला।

बहुत कुछ भूल चुके हैं विक्रम
10 साल बाद घर लौटे विक्रम को अभी ठीक तरह से कुछ याद नहीं है। उन्हें ये तक नहीं मालूम कि, आखिर इन 10 सालों में वो किससे मिले, कहां गए। उन्हें कुछ भी याद नहीं। रिश्तेदारों ने जब उन्हें ढूंढ निकाला तो उस समय विक्रम बेसुध हाल में थे, तन पर गंदे कपड़े और दाढ़ी बढ़ी हुई थी।

गौरतलब है कि, जब विक्रम 20 दिसंबर 2009 को आईटीबीपी कानपुर पहुंचे तो उसके बाद उन्हें जनवरी 2010 में विभागीय कार्य से चंडीगढ़ उच्च न्यायालय जाना पड़ा। 1 फरवरी को वह वापस जरूर आ गए। पर 2 फरवरी को वह अपने बिस्तर से लापता मिले। इस बात की जानकारी तब मिली जब सुबह 5 बजे कर्मी ने उनके गायब होने की बात बताई। इस पूरे घटनाक्रम में काफी खर्चा भी हुआ। पर परिवार ने अपने लाल को ढूंढने की कोशिशें जारी रखी। ITBPपरिजनों का कहना है कि, आईटीबीपी की तरफ से उन्हें विक्रम सिंह की जमा राशि के तीन लाख रुपये जरूर मिले। अब वह अपने बेटे को डॉक्टर को दिखाएंगे उनका अच्छे से इलाज कराएंगे साथ ही 2010 में दर्ज कराई गई गुमशुदगी की रिपोर्ट को निरस्त कराएंगे। बहरहाल विक्रम सिंह के लौटने से सिर्फ परिवार ही नहीं बल्कि पूरे गांव में त्योहार जैसा माहौल है। ऐसा लग रहा है मानो भगवान राम अपना वनवास पूरा कर घर लौटे हो।

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