बंगाल में ध्वस्त हुई स्वास्थ्य व्यवस्था, लेकिन ममता का नाटक अब भी जारी

बंगाल से शुरू हुई डॉक्टरों की हड़ताल पूरे देश में आग की तरह फैल गई है। दरअसल बंगाल में 10 जून को एक मज्जिद के बुजुर्ग इमाम की मौत हो गई थी। परिजनों ने यहां डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया था इसके बाद यहां बुजुर्ग इमाम के परिजनों ने अस्पताल परिसर में हंगामा किया। डॉक्टरों ने आरोप लगाया कि दो ट्रक भरकर यहां गुंडे आए और डॉक्टरों पर हमला किया। जिसके बाद से बंगाल के एनआरएस मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के डॉक्टर अपनी सुरक्षा को लेकर हड़ताल करने पर मजबूर हो गए। वही बंगाल की स्वास्थ्य सेवा शुक्रवार को भी पूरी तरह से ठप्प रहीं। सरकारी अस्पताल के 700 से ज्यादा डॉक्टरों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। ऐसा उन्होंने हड़ताल कर रहे जूनियर डॉक्टरों के प्रति एकजुटता दिखाने के लिए किया। डॉक्टर्स की मांग है कि उन्हें पर्याप्त सुरक्षा दी जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। हड़ताल पर गए डक्टर्स को मुख्यमंत्री ने शुक्रवार की रात मिलने के लिए बुलाया था लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। जिसके बाद उन्होंने शनिवार को एक बार फिर उन्हें मिलने के लिए आमंत्रित किया है ताकि सरकारी अस्पतालों में जारी हड़ताल को खत्म किया जा सके। डॉक्टरों की मांग हैं कि वह उनसे बिना शर्त माफी मांगे। आपको बता दें कि इससे पहले गुरुवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एसएसकेएम अस्पताल पहुंची और उन्होंने हड़ताल कर रहे डॉक्टरों को चार घंटे में काम पर वापस आने का अल्टीमेटम दिया। इसने डॉक्टरों में जारी गुस्से को शांत करने की बजाए भड़काने का काम किया। हालांकि शुक्रवार शाम को चीजों में बदलाव देखा गया। तृणमूल कांग्रेस के नेता और मंत्री पार्थ चटर्जी और फिरहाद हाकिम ने बवाल को शांत करने वाले बयान दिए, डॉक्टरों पर हुए हमले की निंदा की और उनसे काम पर लौटने की अपील की। ये भी पढ़े-ममता बनर्जी ने बीजेपी को दे डाली खुली चुनौती बंगाल को गुजरात नहीं बनने देंगे

बंगाल की मुख्यमंत्री ने हड़ताल पर गए डॉक्टर्स से बोला था “यदि वह काम पर नहीं लौटे तो उनपर कार्रवाई की जाएगी। जिसमें हॉस्टलों से निष्कासन शामिल है”। इससे डॉक्टरों में हलचल और तेज हो गई और सीनियर उनके समर्थन में खड़े हो गए। गुरुवार को एनआरएस अस्पताल के प्रिंसिपल और वाइस प्रिंसिपल ने पद से इस्तीफा दिया था। कॉलेज ऑफ मेडिसिन एंड सागोर दत्ता अस्पताल के 21 सीनियर डॉक्टर भी इस्तीफा दे चुके हैं।  इस बयान के बयान पर एक दिन में 700 से ज्यादा डॉक्टरों का पद से इस्तीफा दे चुके है। ये भी पढ़े- वो आखिरी वक्त में भी मुस्कुरा रहे थे डॉक्टर्स ने बताई जिंदादिल पर्रिकर की कहानी

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