इस शहर में हर रोज 2 लाख लोग मल से फैला रहे हैं कोरोना, जांच में हुआ खुलासा

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खौफ के आलम के बीच लगातार खौफजदा करने वाली खबरों का सिलसिला जारी है। राहत के मौसम के इंतजार में हम भले ही बैठे हों, मगर हालिया स्थिति इस ओर संकेत देना जरूरी नहीं समझ रहे हैं। हर रोज खौफजदा करने वाली खबरों के बीच अब एक और खबर सामने आई है, जिसमें यह बताया जा रहा है कि अब तो कोरोना वायरस मल से भी फैल रहा है। जी हां.. कल तक अपने मुंह पर मास्क और हाथों में सैनिटाइज लगाकर अपने अपने आपको महफूज समझने वाले लोगों के लिए यह यकीनन किसी खौफनाक स्थिति से कम नहीं होगा कि अब कोरोना वायरस इंसानों के मल से भी फैल रहा है।

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इस बात का खुलासा किसी और ने नहीं बल्कि जिस पर पूरी दुनिया की आशा भरी निगाहें टिकी हुई उसी ने किया है, जिसने पूरी दुनिया को कोरोना से लड़ने के हथियार थमाए हैं, उसी ने इस खौफनाक सच का खुलासा कर सभी खौफजदा कर दिया है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, कोरोना मरीजों के मल में करीब 30 दिनों तक कोरोना के जैविक पाए जा सकते हैं , जो कि आस पास के लोगों और आबोहवा के लिए खतरनाक साबित हो सकते है। वैज्ञानिकों ने अपने इस खुलासे में यह भी कहा कि संक्रमित मरीज कितने दिनों तक अपने मल के माध्यम से RNA छोड़ते हैं।

इस बीच हम आपको हिंदुस्तान के एक ऐसे ही शहर के बारे में बताने जा रहे हैं,  जहां कोरोना मरीजों के मलों ने यूं समझिए की आफत मचा रखी है। यहां पर कोरोना मरीजों के मलों से कोरोना फैलने का खतरा बढ़ गया है। यह शहर कोई और नहीं बल्कि हैदराबाद है। हालांकि खतरनाक होती स्थिति पर अंकुश लगाने के लिए लगातार वैज्ञानिक शोध कार्य में लगे हुए हैं। सीवेज कोरोना सेंपल कलेक्ट किए जा रहे हैंं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि हैदराबाद के किस शहर में कितना कोरोना का प्रभाव पड़ा है।

देश के प्रसिद्ध वैज्ञानिक संस्थाओं की टीम ने किया खुलासा 
देश के प्रसिद्ध संस्था CSIR-CCNB और CSIR-IICT  ने एक साथ मिलकर इस प्रोजेक्ट को पूरा किया है। इन संस्थाओं का कहना है कि किस इलाके में कोरोना का कितना खतरा है। यह जानने के लिए सबसे मुफीद रहेगा कि हम सीवेज जांच करें। वहीं अब बात कर लेते हैं कि हैदराबाद की, जहां पर 180 लीटर उपयोग होता इसमें से 40 फीसदी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (STP) में जाता है। STP से सीवेज सैंपल लेने से पता चला कि शहर के किस इलाके में कोरोना वायरस के RNA की क्या स्थिति है। कोरोना वायरस का आरएनए उस जगह से लिया गया है, जहां पर गंदगी रहती है, चूंकि अगर ट्रिटमेंट हो गया तो उसमें वायरल आरएनए नहीं मिलेगा। वैज्ञानिकों के शोध में खुलासा हुआ है कि हैदराबाद में 80 फीसद एसटीपी की जांच की तो पता चला कि  करीब 2 लाख लोग कोरोना के जैविक को अपने मल के जरिए निकाल रहे हैं। इतना ही नहीं, जब इन आंकड़ों की जांच की गई तो पता चला कि हैदराबाद में करीब 2 लाख लोग अकेले कोरोना से बीमार चल रहे हैं।

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