rice in space

बीजिंग। जैसा की आप सभी जानते हैं चीन हमेशा नए रिकॉर्ड बनता रहता है जिसके कारण वो दुनियाभर में फेमस है। अब चीन ने दावा किया है कि उसने अंतरिक्ष (Space) में धान (Paddy) पैदा किया है। चीन ने इस धान का नाम स्पेस राइस (Space Rice) दिया है। यहाँ तक कि चीन ने इसके बीज के धरती पर भेजा है। वहीं, सोशल मीडिया पर लोग चीन के इस कारनामे को स्वर्ग का चावल कह रहे हैं। केवल यही नहीं चीन की चांद पर एक अनुसंधान केंद्र तैयार करने की योजना है।

 ,[object Object],रिपब्लिक वर्ल्ड डॉट कॉम की खबर के मुताबिक, चीन ने पिछले साल नवंबर में अपने चंद्रयान के साथ धान के बीज भी अंतरिक्ष में भेजे थे. अब अंतरिक्ष यान के जरिए 1500 धान के बीज धरती पर आए हैं. इनका वजन 40 ग्राम है. इनको दक्षिण चीन कृषि विश्वविद्यालय परिसर में बोया जाएगा.रिपब्लिक वर्ल्ड डॉट कॉम की खबरों की मानें तो चीन ने पिछले साल नवंबर में अपने चंद्रयान के साथ धान के बीज भी स्पेस में भेजे थे। अब अंतरिक्ष यान के माध्यम से 1500 धान के बीज धरती पर आए हैं। इनका वजन 40 ग्राम है। बताया जा रहा है इन चावल को दक्षिण चीन कृषि विश्वविद्यालय परिसर में बोया जाएगा।

 ,[object Object],अंतरिक्ष में ये बीज ब्रह्मांडीय विकिरण और शून्य गुरुत्वाकर्षण के संपर्क में रहे. फिर इनको वापस धरती पर लाया गया है. इन बीजों की लंबाई अब करीब 1 सेंटीमीटर है. ग्वांगडोंग के दक्षिण चीन कृषि विश्वविद्यालय के अंतरिक्ष प्रजनन अनुसंधान केंद्र के उप निदेशक गुओ ताओ के मुताबिक कि सबसे बेहतर बीज प्रयोगशालाओं में तैयार होंगे. इसके बाद इन्हें खेतों में लगाया जाएगा.स्पेस में ये बीज ब्रह्मांडीय विकिरण और शून्य गुरुत्वाकर्षण के संपर्क में रहे। जिसके बाद इनको धरती पर लाया गया है। अब इन बीजों की लंबाई लगभग 1 सेंटीमीटर है। ग्वांगडोंग के दक्षिण चीन कृषि विश्वविद्यालय के अंतरिक्ष प्रजनन अनुसंधान केंद्र के उप निदेशक गुओ ताओ ने बताया कि सबसे बेहतर बीज प्रयोगशालाओं में तैयार होंगे। इसके बाद इन्हें खेतों में उगाया जाएगा।

 ,[object Object],ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन अबतक 200 से ज्यादा फसलों के साथ इस तरह के प्रयोग कर चुका है. इन फसलों में कपास से लेकर टमाटर तक शामिल हैं. चीन के मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार साल 2018 में चीन में 24 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में खेती के लिए अंतरिक्ष से आए बीज का इस्तेमाल किया गया था.स्पेस के वातावरण में कुछ वक्त तक रहने के बाद बीज में कई प्रकार के बदलाव होते हैं। धरती पर बोने से इनकी अधिक पैदावार होती है। न सिर्फ धान बल्कि दूसरी फसलों के साथ भी इस प्रकार के प्रयोग किये जाते हैं। आपको बता दें कि चीन साल 1987 से चावल और दूसरी फसलों के बीज को स्पेस में ले जा रहा है।

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