Monday, January 25, 2021
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3 रुपए 46 पैसे चुकाने 15 किलोमीटर पैदल चला किसान, बैंक ने फोन कर बुलाया अर्जेंट

देश में कोरोना संकट के बीच एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसे सुनने और देखने के बाद हर कोई हैरान रह गया. दरअसल यह पूरा मामला बैंक से जुड़ा है. क्या आप बैंक में बकाया राशि जिसकी कीमत महज 5 रूपए के कुरकुरे के पैकेट से भी कम है. और आपको बैंक फोन कर अर्जेंट बुलाकर इसे अभी भरने को कहे. तो क्या आप जाएंगे?. हालांकि वो भी ऐसे माहौल में जहां चारों तरफ लॉकडाउन की स्थिति बनी हुई है. आने-जाने के वाहनों की कमी है तो ऐसे में आप बैंक तक कैसे पहुंचेंगे. जब आपके पास कोई वाहन ही नहीं है तो?. मजबूरन आपको पैदल ही जाना पडे़गा. बिल्कुल ऐसा ही वाक्या कर्नाटक के पहाड़ी जिले शिमोगा से सामने आया है, दरअसल यहां के रहने वाले किसान आमदे लक्ष्मीनारायण के पास शहर के केनरा बैंक की शाखा से फोन आया. और उन्होंने किसान को लोन को लोन तुरंत चुकाने के लिए कहा. लेकिन लोन की राशि क्या है? इस पर कोई बात नहीं की, पहले तो फोन किया और फिर अर्जेंट आने को कहा. किसान घबरा गया सड़क पर पहुंचा तो वाहन की कमी थी. चूंकि लॉकडाउन लगा हुआ है तो वाहनों की आवाजाही भी कम हो चली है. तो फिर क्या था किसान 15 किलोमीटर का सफर कर पैदल ही बैंक पहुंच गया.

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बैंक लोन की आखिरी तारीख क्या थी?, कितनी रकम चुकानी है. यह सब बिना बताए किसान को बैंक बुला लिया. फिर जो बाद में हुआ हर कोई हैरान रह गया. लक्ष्मीनारायण जब बैंक पहुंचा तो अधिकारियों ने बताया कि लोन की बकाया राशि सिर्फ 3 रुपये 46 पैसे है. अधिकारियों की बात सुनकर किसान हैरान हो गया और तुरंत ही लोन की राशि का भुगतान कर दिया.

लोन

अब इस कहानी का पूरा किस्सा समझ लीजिए. दरअसल किसान लक्ष्मीनारायण ने 35 हजार रुपये का एग्रीकल्चर लोन बैंक से लिया था. जिसमें से 32 हजार रुपये सरकार द्वारा माफ कर दिए गए थे, अब इसके बाद किसान ने कुछ महीने पहले 3 हजार रुपये देकर लोन क्लियर किया था. उन्होने कहा, ‘जब बैंक ने मुझे तुरंत लोन क्लियर करने के लिए बोला तो मैं घबरा गया. लॉकडाउन के कारण कोई बस सेवा नहीं थी, मेरे पास कोई वाहन नहीं है, साइकिल भी नहीं है. मैं बकाया राशि को चुकाने के लिए पैदल ही बैंक की ओर निकल पड़ा. जब मैं यहां पहुंचा को मुझे पता चला कि बकाया राशि सिर्फ 3 रुपये 46 पैसे है.’ उन्होंने कहा कि बैंक पहुंचने के बाद उन्हें काफी झटका लगा.

canara-bank

इस मामले पर बैंक प्रबंधक एल पिंगवा का कहना है कि शाखा में ऑडिटिंग का काम चल रहा है. जिसमें सभी लोन के अमाउंट को क्लियर करना था, जिस वजह से किसान को थोड़ी तकलीफ उठानी पडी. लोन अमाउंट में किसान के सिग्नेचर भी चाहिए थे. इसलिए इन्हें फोन कर अर्जेंट बुलाया गया.

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