पाकिस्तान का ये शहर श्रीराम के पुत्र लव ने बसाया था, इस राजपरिवार ने किया बड़ा खुलासा

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राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विवाद की सुनवाई इन दिनों देश की सर्वोच्च अदालत में चल रही है। लेकिन इस सुनवाई ने देश में एक और विवाद खड़ा कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या विवाद की सुनवाई के दौरान ये सवाल किया गया था कि क्या भगवना राम का कोई वंशन दुनिया में या अयोध्या में मौजूद है? सुप्रीम कोर्ट के इस सवाल के बाद देश में ही बल्कि पाकिस्तान में भी राम के वंशज सामने आए है। एक परिवार ने दावा किया है कि भगवान राम के पुत्र लव ने ही पाकिस्तान के लाहौर को बसाया था। उस दौरान लाहौर को लवकोटे कहा जाता था और उन्ही के हम वंशज है।

दरअसल ये दावा मेवाड़ राजघराने ने किया है। उनका दावा है कि वह भी श्रीराम के वंशज है। उनके वंश का निकास श्रीराम के बेटे लव से होता है और लव ने ही लाहौर बसाया था जिसे पहले लवकोटे कहा जाता था। लव के वंशज ही कालांतर में आहाड़ आए जो अब मेवाड़ है और जहां सिसोदिया वंश की स्थापना की गई। मेवाड़ घराने के सदस्य महेंद्रसिंह मेवाड़ ने कहा कि श्री राम वंशज होने संबंधी दस्तावेज जयपुर राजघराना ढाई दशक पहले ही अदालत को सौंप चुका था लेकिन उस पर आगे कुछ नहीं हुआ। अब कोर्ट ने इस पर सवाल उठाए हैं, जबकि मामला श्रीराम के वंशज होने का नहीं, बल्कि अयोध्या मंदिर का है। इसके आगे उन्होंने कहा कि मेवाड़ में उनकी 76 पीढ़ियां तो इतिहास में दर्ज है जबकि राजघराने का इतिहास हजारों साल पुराना है।

हालांकि मेवाड़ राजघराने से लक्ष्यराजसिंह मेवाड़ ने भी इस राजघराने को राम का वंशज बताया था। इस दौरान उन्होंने कहा था कि कर्नल जेम्स टॉड ने भी अयोध्या के बारे में लिखा था। कि अयोध्या श्रीराम की राजधानी रहा। उन्होंने यह भी लिखा था कि श्रीराम के बेटे लव ने लवकोटे यानी लाहौर को बसाया। लाहौर से ही राजवंश कालांतर में गुजरात होते हुए मेवाड़ आया। चित्तौड़ के बाद उदयपुर को इसी राजधानी बनाया। श्रीराम भी शिव के उपासक थे और मेवाड़ राजपरिवार भी भगवान शिव यानी एकलिंगनाथ का उपासक है। हम मानते हैं कि मेवाड़ का राजा भगवान एकलिंगनाथ है।

इसके पहले जयपुर के जयपुर की पुर्व राजपरिवार की सदस्य और बीजेपी सांसद दीया कुमारी ने भी खुद को श्री राम का वंशज बताया। दीया कुमारी ने कहा था कि वे भगवान राम के वंशज हैं। उन्होंने कहा कि जयपुर राजपरिवार की गद्दी भगवान राम के पुत्र कुश के वंशजों की राजधानी है। दीया कुमारी ने ट्वीट कर कहा था कि कोर्ट में सवाल उठा था कि क्या कोई श्रीराम के वशंज हैं या नहीं। इस पर जवाब देते हुए दीया कुमारी ने लिखा कि हमारा परिवार भी श्रीराम से जुड़ा है। हमारे अलावा और भी कई परिवार है जो श्रीराम के वंशज है। इसकी वंशावली और दस्तावेज पोथीखाने में मौजूद हैं।

इसके अलावा पूर्व राजमाता पद्मनी देवी ने भी कहा कि साल 1992 में पूर्व महाराजा स्व. भवानी सिंह ने मानचित्र सहित सभी दस्तावेज कोर्ट को सौंप दिए थे। भगवान राम के पुत्र कुश के वंशज होने से ढूंढाड़ के राजा कछवाहा कहलाने के साथ राम की 309वीं पीढ़ी में मानते हैं। इन सभी के दस्तावेज सिटी पैलेस के कपड़ाद्वारा में सुरक्षित पड़े है। जिनसे साबित होता है कि अयोध्या में राम मंदिर की भूमि जयपुर रियासत के अधिकार में रही है। ये भी पढ़ें:-धारा 370 के बाद अब राम मंदिर की बारी? तेज हुआ मंदिर निर्माण कार्य

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