Wednesday, January 20, 2021
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नस्लवाद की टिप्पणी को लेकर इन खिलाड़ियों का बदल गया है नजरिया

मेलबर्न। कहा जाता है कि क्रिकेट सभ्य लोगों का खेल है लेकिन इसमें भी एक टीम के खिलाड़ी दूसरे टीम के खिलाड़ी पर टिप्पणी करते हैं। कभी-कभी यह टिप्पणी भारी पड़ जाती है। ऑस्ट्रेलिया के टेस्ट कप्तान टिम पेन ने कहा है कि ब्लैक लाइव्स मैटर अभियान से पहले वह चीजों की अनदेखी करते थे। उप-कप्तान पैट कमिंस ने अश्वेत लोगों के प्रति गलत टिप्पणी करने की बात स्वीकार की है जिसका उन्हें अब अफसोस है। पेन ने कहा कि वह नस्लवाद की समस्या के बारे में अधिक नहीं सोचते थे क्योंकि इसका असर उन पर नहीं पड़ता था लेकिन बीएलएम अभियान ने उनके नजरिए को बदल दिया। उन्होंने इन टिप्पणियों के प्रति सकारात्मक सोच रखने का पक्ष लिया।  पेन ने कहा कि ब्लैक लाइव्स मैटर अभियान के शुरू होने के बाद पिछले 12 महीने में मेरा नजरिया बदला है। अगर मैं पूरी ईमानदारी से कहूं तो मैं शायद वह व्यक्ति था जो चीजों की थोड़ी अनदेखी करता था और शायद यह मेरी दुनिया का हिस्सा नहीं था इसलिए मेरे लिए यह कोई बड़ा मुद्दा नहीं था। पेन ने कहा कि इसने चीजों और हमारे यहां लोगों को, अश्वेत लोगों और दुनिया भर में अलग-अलग संस्कृतियों के लोगों को जिन चीजों का सामना करना पड़ रहा है उन मुद्दों को लेकर मेरी आंखें खोल दी। अब मैं दुनिया की इस चीज को करीब से जान गया हूं। कमिंस से जब यह पूछा गया कि उन्होंने नस्लवाद से निपटने में युवाओं की मदद कैसे की। कमिंस ने कहा आप जो भी कह रहे हो या कर रहे हो उसे करने से पहले कुछ सेकेंड और सोचो।

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आप चुटकुला सुनाने की कोशिश करते हो और मैं अतीत में ऐसा कर चुका हूं। इस तेज गेंदबाज ने कहा कि आप कोई टिप्पणी करते हो और इसके बाद सुनिश्चित करते हो कि आप असल में इस पर गौर करें। मैं इस पर विश्वास नहीं करता था और मुझे नहीं पता था कि मैंने ऐसा क्यों कहा और मुझे नफरत है। मेरी वजह से उस व्यक्ति ने कैसा महसूस किया। पेन ने कहा कि उन्होंने टीम के अपने साथियों से उनके अनुभव के बारे में बात की और इससे उन्हें चीजों को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिली। उन्होंने कहा कि लेकिन इस अभियान के बाद मैंने समय निकालकर टीम के अपने साथियों से बात की। क्या तस्मानिया या हरिकेंस या क्लब क्रिकेट में ऐसा होता है? वे इसके बारे में क्या महसूस करते हैं और इसका उन पर क्या असर पड़ता है।

पेन ने कहा कि मैंने टीम के अपने साथियों से बात करके सीखा। टीम के सदस्यों ने वास्तविक स्थिति से अवगत कराया। मैंने अधिक बेहतर समझा कि इसका उन पर क्या असर पड़ता है और मैं इसमें उनकी कैसे मदद कर सकता हूं। कमिंस ने कहा कि डार्क इमू नाम की किताब पढ़ने के बाद नस्लवाद और देशज संस्कृति को लेकर उन्हें नया नजरिया मिला। अब इस मामले में सकारात्मक सोच रखते हैं।

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