नई दिल्ली। टोक्यो ओलंपिक में महिलाओं का प्रदर्शन सुर्खियां बनी तो भारतीय खिलाड़ियों की अनुशासनहीनता के जो तीन मामले आए, वह भी महिलाओं को लेकर रहे। इनके लपेटे में आई महिला पहलवान विनेश फोगाट, सोनम मलिक और टेबल टेनिस खिलाड़ी मनिका बत्रा। यह ठीक है कि पहली निगाह में विनेश फोगाट, सोनम मलिक और मनिका बत्रा तीनों का आचरण सही नहीं था। साफ है कि इन तीनों ने अनुशासनहीनता की। कार्रवाई होनी चाहिए। आमतौर पर इसके लिए खेल फेडरेशन की अनुशासन समिति होती है। जांच के बाद सजा भी वही सुनाती है। इसलिए प्रक्रिया पूरी होने से पहले मामला मीडिया में जाना भी उचित प्रतीत नहीं होता। पहले ही फैसला सुना देना भी ठीक नहीं लगता।

खिलाड़ी कितना भी बड़ा क्यों न हो, उसे बख्शा नहीं जाना चाहिए, लेकिन इस बात से परहेज करना चाहिए कि खिलाड़ी से बात किए बिना उसकी प्रतिष्ठा पर चोट हो। महिला पहलवान विनेश फोगाट के मामले में एक तरफ तो उससे स्पष्टीकरण मांगा गया और दूसरी ओर निलम्बन की घोषणा भी कर दी गई। ऐसे उतावलेपन से बचना चाहिए। विनेश फोगाट कोई छोटी पहलवान नहीं हैं। फ्रीस्टाइल के 53 किलो वर्ग में वह दुनिया की नंबर वन पहलवान हैं। उन्होंने विश्व चैंपियनशिप में भी पदक जीते हैं। ओलंपिक में पदक जीतना उनका सपना था जो लगातार दूसरे ओलंपिक में टूट गया। 2016 के रियो ओलंपिक में उनका यह सपना तब चकनाचूर हो गया था जब वह क्वार्टर फाइनल में चोटिल होकर पदक दौड़ से बाहर हो गई थीं। लेकिन बीते कुछ वर्षों में इस झटके से उबरकर उन्होंने सफल वापसी कर कई पदक जीते। इस बार टोक्यो में उनसे स्वर्ण की उम्मीद थी। सब कुछ सही चल रहा था।

हंगरी में ट्रेनिंग कर वह टोक्यो पहुंची थीं। वहां पहुंचकर निजी फिजियो की ओलंपिक में जरूरत को लेकर मामला फंसा। बात नहीं मानी गई तो बड़ी पहलवान होने के नखरे दिखाते हुए उन्होंने हंगामा किया। खेल गांव में रहने को लेकर, फिर साथी पहलवानों के साथ ट्रेनिंग नहीं करने का मामला गरमाया और फिर ओलंपिक में टीम स्पांसर की जर्सी पहनकर नहीं लड़ना भी बड़ा मुद्दा बन गया। अपनी शारीरिक और मानसिक स्थिति को खिलाड़ी से बेहतर कोई नहीं जान सकता। अगर कोई परेशानी हो तो बातचीत से ही समस्या का हल निकाला जा सकता है।

वहीं विनेश फोगाट ने एक लेख में कहा है कि मुझे ऐसा लगता है कि मैं सपने में सो रही हूं और अभी कुछ शुरू ही नहीं हुआ है। मैं खाली हूँ। मुझे नहीं पता कि जीवन में क्या हो रहा है। पिछले एक हफ्ते से मेरे अंदर इतना कुछ चल रहा है। यह दो दिलों, दो दिमागों की कहानी है। मैंने कुश्ती को सब कुछ दिया है और अब जाने का सही समय है। लेकिन दूसरी ओर मैं चली जाती हूं और लड़ती नहीं हूं, तो कमजोर दिखूंगी। यह मेरे लिए एक बड़ा नुकसान होगा। अभी, मैं वास्तव में अपने परिवार पर ध्यान देना चाहती हूं।

महिला स्टार पहलवान ने बताया कि मैं अपना वजन कम कर रही थी। जिसके चलते मुझे साल्ट कैप्सूल लेना पड़ता था, मुझे उनकी आदत हो गई है। लेकिन टोक्यो में उनसे मदद नहीं मिली। यहां में अकेली थी। मैं खुद फिजियो थी और खुद पहलवान भी। मुझे शूटिंग टीम से एक फिजियो सौंपा गया था। वह मेरे शरीर को नहीं समझता था। उसमें उनकी कोई गलती नहीं है। विनेश फोगाट ने कहा कि बाहर हर कोई मेरे साथ ऐसा व्यवहार कर रहे हैं जैसे मैं मरी हुई चीज हूं। वो कुछ भी लिखते हैं, करते हैं… मैं जानती थी कि भारत में आप जितनी तेजी से उठते हैं उतनी ही तेजी से गिरते हैं। एक पदक (खोया) और सब कुछ समाप्त हो गया। कुश्ती को भूल जाइए, इंसान को सामान्य रहने दीजिए। साथी एथलीट आपसे यह नहीं पूछते कि क्या गलत हुआ, वे आपको बताते हैं कि मैंने क्या गलत किया।

मैं हैरान हूं कि वे अपना नजरिया खुद बनाते हैं। कम से कम मुझसे पूछो कि मैट पर मेरे साथ क्या हुआ और मैं किन चीजों से गुज़र रही थी। स्टार रेसलर ने बताया कि मैं वजन कम कर रही थी। मैं अपनी खुद की फिजियो थी और मैं पहलवान भी। मुझे शूटिंग टीम से एक फिजियो सौंपा गया था। वह मेरे शरीर को नहीं समझता था। मेरे खेल की बहुत विशिष्ट मांगें हैं। मेरे नियमित फिजियो के लिए वह मेरी मदद नहीं कर सकता था। मैंने बाउट से एक दिन पहले खाना नहीं खाया था। मैंने कुछ पोषण पिया लेकिन मैं चिंतित महसूस कर रही थी। मैं दर्द में थी। मेरे शरीर में कुछ भी नहीं था। अंतत: मुझे उल्टी हुई।

स्टेडियम के लिए बस की सवारी में, मैंने पूर्णिमा (मेरे फिजियो) को फोन किया और उनसे पूछा कि मैं क्या कर सकती हूं। उन्होंने कहा, ”दूसरे मुकाबले में मुझे पता था कि मैं हार रही हूं। मैं देख सकती हूं कि सब कुछ दूर जा रहा है, लेकिन मैं कुछ नहीं कर सकती। फोगाट का कहना है कि चूंकि मुझे पहली बार (अगस्त 2020) कोविड हुआ, इसलिए मैं प्रोटीन को पचा नहीं पा रही। एशियन चैंपियनशिप के बाद जब मैं कजाकिस्तान से वापस आई तो फिर से बीमार पड़ गई। मुझे दूसरी बार कोविड हो गया। मैं ठीक हुई और बुल्गारिया के लिए उड़ान भरी।

कुछ दिनों बाद, मेरे परिवार ने घर वापस सकारात्मक परीक्षण किया। जब ये चीजें हुई हैं तो मैं भारतीय टीम के साथ क्यों रहूंगी? सात दिनों तक प्रतिदिन उनका परीक्षण किया गया। इसीलिए वे दूसरे खिलाड़ियों की सेफ़्टी और यह सुनिश्चित करने के लिए कि वे पॉज़िटिव नहीं हैं 2-3 दिनों के लिए टीम से दूर रह रही थी।

वहीं टेबल टेनिस खिलाड़ी मनिका बत्रा ने जो आचरण किया, वह बिल्कुल भी सही नहीं था। विभिन्न खेलों के साथ प्रशिक्षक की नियुक्ति की जाती है। आप कोई आमंत्रण टूर्नामेंट में नहीं खेल रहे, ओलंपिक में देश की नुमाइंदगी कर रहे हो। फिर आप पदक के प्रबल दावेदार खिलाड़ी भी नहीं थे कि निजी कोच की मौजूदगी पर अड़ें। कोच के रूप में सौम्यदीप राय स्टेडियम में मौजूद थे पर मनिका ने उनकी सेवाएं लेने से इनकार कर दिया। यह कोच का ही नहीं, राष्ट्र का भी अपमान है। आप पर देश की साख बढ़ाने की जिम्मेदारी है, गिराने की नहीं। ऐसी खिलाड़ियों की अकड़ को ठिकाने लगाने की जरूरत है।

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