Wednesday, December 8, 2021

संगीत और वीणा के जनक हैं देव ऋषि नारद, ब्रह्मांड के पहले पत्रकार जो रखते थे संवाद तंत्र

Must read

- Advertisement -

नारायण, नारायण के पर्याय हैं नारद मुनि। नारद जी का नाम आते ही आस्था का संचार होता है। नारद मुनि नारायण के परम भक्त व देवताओं के बीच संवाद तंत्र थे। नारद मुनि हिन्दू शास्त्रों के अनुसार ब्रह्मा के मानस पुत्रों में से एक से हैं। वह देवताओं और भक्तों के बीच संवाद पहंुचाने के कारण ब्रह्मांड के पहले पत्रकार माने जाते हैं। 27 मई को गुरूवार को देवर्षि नारद की जयंती । श्रद्धालु विधि-विधान से देवर्षि नारद की पूजन-अर्चना करते हैं। ऐसी मान्यता है कि ज्येष्ठ माह की प्रतिपदा के दिन भगवान विष्णु भक्त नारद का जन्म हुआ था। ऐसे में इस दिन नारद जयंती मनाई जाती है। ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार संगीत और वीणा के जनक देव ऋषि नारद का जन्म सृष्टिकर्ता ब्रह्माजी के कंठ से हुआ था। नारद जी को तीनों लोकों में वायु मार्ग द्वारा विचरण करने का वरदान प्राप्त है। इस दिन नारदजी की पूजा करने से व्यक्ति को बल और बुद्धि मिलती है।

- Advertisement -

ये भी पढ़ेंः-जब 17 साल की प्रियंका चोपड़ा से शादी करना चाहते थे शाहरुख खान, सबके सामने दिया था ऑफर

नारद जयंती की पूजा विधि
नारद जयंती के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने के बाद देवर्षि नारद की पूजा आराधना करनी चाहिए। नारद जयंती के दिन सूर्योदय से पहले स्नान करके साफ कपड़े पहनें और व्रत का संकल्प करें और आस्था से पूजा-अर्चना करें। नारदजी को चंदन, तुलसी के पत्ते, कुमकुम, अगरबत्ती, फूल अर्पित करें। शाम को पूजा करने के बाद, भक्त भगवान विष्णु की आरती करें। ब्राह्मणों को भोजन कराने के बाद दान करें।

ऐसे हुई थी देवर्षि नारद की उत्पत्ति
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नारद जी पूर्व जन्म में ‘उपबर्हण‘ नाम के गंधर्व थे। उन्हें अपने रूप पर बहुत अभिमान था। एक बार अप्सराएं गंधर्व गीत और नृत्य से ब्रह्मा की आराधना कर रही थीं। तब उपबर्हण स्त्रियों के साथ श्रृंगार भाव से वहां आये। उपबर्हण का यह अशिष्ट आचरण देख कर ब्रह्मा नाराज हो गए और उन्होंने उसे ‘शूद्र योनि‘ में जन्म लेने का श्राप दे दिया। ब्रह्माजी के श्राप के बाद नारदजी का जन्म ‘शूद्रा दासी‘ के घर पर हुआ। उन्होंने प्रभु की भक्ति आराधना की तो उन्हें एक दिन ईश्वर के दर्शन हुए। दर्शन के बाद नारद जी के मन में ईश्वर और सत्य को जानने की लालसा बढ़ गई। उसी समय आकाशवाणी हुई कि ‘हे बालक, इस जन्म में अब तुम मेरे दर्शन नहीं कर पाओगे। अगले जन्म में तुम मेरे पार्षद होंगे। इसके बाद नारद जी भगवान विष्णु की कठिन तपस्या की। तपस्या के बाद ब्रह्माजी के मानस पुत्र के रूप में नारद जी अवतरित हुए।

ये भी पढ़ेंः-रितेश पांडेय का नया गाना हुआ रिलीज़, संभावना सेठ ने दिखाई अपनी चॉकलेटी जवानी

- Advertisement -

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest article