मां लक्ष्मी को धन की देवी कहा जाता है. धन की देवी लक्ष्‍मी की आराधना के प्रमुख व्रत महालक्ष्‍मी (Mahalaxmi Vrat 2021) का उद्यापन करने का समय है. यह उपवास भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से शुरू हुआ था और 16 दिन बाद अश्विन महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि (28 सितंबर) को पूर्ण होगा. इस दिन हाथी पर कमल के आसन पर बैठीं गज लक्ष्मी (Gajlaxmi) माता की व्रत-पूजा विधि-विधान से करने पर जिंदगी में सभी दुखों का नाश होता है और अपार धन-वैभव मिलता है. चूंकि इस व्रत में देवी हाथी पर सवार होकर आती हैं इसीलिए इसको गज लक्ष्‍मी व्रत के नाम से भी पुकारा जाता है.

इस व्रत का होता है बहुत प्रभाव

महालक्ष्‍मी व्रत को धर्म-शास्‍त्रों में बहुत मुख्य बताया गया है. इनके अनुसार जब पांडवों ने अपना सब कुछ जुएं में हार गये थे तो भगवान श्रीकृष्‍ण (Lord Shrikrishna) ने युधिष्ठिर को यह व्रत करने के लिये कहा था. ताकि पांडव दोबारा अपना राजपाठ और धन-ऐश्‍वर्य वापस पा सकें. पौराणिक मान्यता है कि जो कोई गज लक्ष्मी का व्रत-पूजन पूरी श्रद्धा से करता है, तो उसके घर में कभी भी दरिद्रता, गरीबी नहीं आती है. साथ ही देवी गज लक्ष्‍मी सारी मनोकामनाएं भी पूरी करती हैं.

जरूर करें यह उपाय

इस दिन कुछ उपाय (Upay) करने से देवी गज लक्ष्‍मी की भक्तों पर बहुत अलग ही कृपा मिलती है. इसके लिए पितृ पक्ष की अष्टमी के दिन किसी भी ब्राह्मण या सुहागन स्त्री को सोना, कलश, इत्र, आटा, शक्कर और घी उपहार स्वरूप दान दें. इसी के साथ ही कन्या को नारियल, मिश्री, मखाने और चांदी का हाथी भेंट करें. अगर चाहे तो आप ये सारा सामान अपनी बेटी को भी दे सकते हैं. ऐसा करने से देवी महालक्ष्मी खुश होकर आपको अपार धन-दौलत देंगी.

(नोट: इस लेख में दी गई सूचनाएं सामान्य जानकारी और मान्यताओं पर आधारित हैं. upvartanews इनकी पुष्टि नहीं करता है.)