बदल रहे हैं लोग माघ मेला में पुरोहितों को दान में अब मिलने लगी है अलग चीजें, जान कर होंगे दंग

प्रयागराज में हो रहे माघ मेले में कल्‍पवासियों द्वारा तीर्थ पुराहितों को दिए जाने वाले दान की परंपरा में अब काफी बड़ा बदलाव हो रहा है.

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हर साल प्रयागराज में लगने वाला माघ मेला बेहद फेमस है. इस मेले में भाग लेने के लिए देश के हर कोने से लोग आते हैं. यहां पर बड़ी तादाद में लोग यहां पर एक महीने के कल्‍पवास में रहने के लिए आते हैं. कल्‍पवास पौष पूर्णिमा से माघी पूर्णिमा तक मतलब कि पौष माह के 11वें दिन से शुरू होकर माघ माह के 12वें दिन तक चलता है.

होते हैं काफी नियम

कल्पवास में लोग एक महीने तक काफी सारे कड़े नियमों का पालन करते हैं. जैसे कि भीषण सर्दी में लोगों को उठकर सुबह जल्दी ही नहाना, जमीन पर सोना , सादा भोजन करना जैसे नियमों को शामिल करना है. जो कि एक बार कल्पवास का संकल्प लेता है. उसको 12 सालों तक जारी रखना होता है. ऐसी मान्यता है कि कल्पवास करने से एक कल्प (ब्रह्मा का एक दिन) का पुण्य प्राप्त होता है.

दान करते हैं कल्‍पवासी

प्रयागराज के संगम पर कल्‍पवास करने वाले लोग इधर से विदा लेने से पहले ही तीर्थ पुरोहितों को अपनी क्षमता के हिसाब से दान करते हैं. ऐसी मान्‍यता है कि कल्‍पवासी यहां जितना दान किया जाता है उसे परलोक में उतना ही अधिक सुख प्राप्त होता है. इस दान क्षेत्र में आकर सम्राट हर्षवर्धन अपना सर्वस्व न्यौछावर कर जाते थे. उसी समय से दान की यह परंपरा चली आ रही है.

स्‍कूटी, लेपटॉप और फ्रिज भी कर सकते हैं दान

खबरों के मुताबिक इस साल माघ मेले में आये हुए श्रद्धालु तीर्थ पुरोहितों को दान में स्‍मार्टफोन, स्‍कूटी, लेपटॉप, एलईडी टी.वी , फ्रिज जैसी दान कर रहे हैं. इन श्रद्धालुओं में देश के अतिरिक्त विदेशों से आए लोग भी यहां शामिल हैं. ये दान शैया दान के अंतर्गत दिए जाते हैं. इसके पीछे श्रद्धालुओं का ऐसा भी मानना है कि रोजमर्रा की चीजें दान में दे से भी लाभ होता है क्‍योंकि वे इनका उपयोग अच्‍छे से कर सकते हैं.

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