Chanakya

चाणक्य द्वारा रचित ग्रन्थ चाणक्य नीति शास्त्र में जीवन के गूढ़ विषयों के बारे में बताया गया है। साथ ही यह भी बताया गया है कि अगर जीवन में कोई समस्या आ जाये तो उससे कैसे निपटा जाये।चाणक्य नीति में धन, तरक्की, विवाह, व्यापार, नौकरी, मित्रता और दुश्मनी समेत कई बातों का जिक्र किया गया है। इसमें सफलता पाने के भी उपाय बताये गये हैं। आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जिन कामों में किसी का अहित छिपा हो वह काम सहीं नहीं होता। अत: वह काम न करना ही बेहतर होता है।

आचार्य चाणक्य ने अपने जीवन का अधिकांश समय शिक्षा ग्रहण करने और शिक्षा प्रदान करने में बिताया है। यही कारण है उनका नाम भारत के श्रेष्ठ विद्वानों लिया जाता है। चाणक्य अपने समय के विश्व प्रसिद्ध तक्षशिला विश्वविद्यालय के शिक्षक थे। चाणक्य ने अपने ग्रन्थ चाणक्य नीति में जीवन को प्रभावित करने वाले विषयों के बारे में जानकारी दी है। चाणक्य को अर्थशास्त्र, राजनीति शास्त्र, कूटनीति शास्त्र, सैन्य विज्ञान और समाज शास्त्र के साथ-साथ नैतिक शास्त्र का भी श्रेष्ठ ज्ञान था। चाणक्य को युवा शक्ति पर दृढ़ विश्वास था। उनका मानना था कि युवा ही बदलाव के प्रबल समर्थक होते हैं। ऐसे में युवाओं को कुछ बातों पर विशेष ध्यान देना चाहिए जिससे वह अपना लक्ष्य आसानी से हासिल कर सकें।

अनुशासन को महत्त्व देना आवश्यक

चाणक्य नीति में कहा गया है कि जो युवा अपने जीवन में अनुशासन के महत्व को नहीं देता है। उसे अपना लक्ष्य हासिल करने के लिए अधिक संघर्ष करना पड़ता है। ऐसे लोगों को उनके जीवन में सफलता कम असफलता ज्यादा प्राप्त होती है। चाणक्य का मानना है कि युवाओं को अपने जीवन को अनुशासित बनाये रखना चाहिए।

ज्ञान प्राप्ति के लिए हमेशा तैयार रहें

चाणक्य का मानना है कि युवाओं को अपने ज्ञान में वृद्धि के लिए लगातार कोशिश करते रहना चाहिए। इसके लिए अगर उन्हें कठोर से कठोर संघर्ष करना पडे़ तो तैयार रहना चाहिए। ज्ञान की प्राप्ति आसानी से नहीं होती है। इसके लिए ठीक वैसे ही मेहनत करनी पड़ती है जैसे कोई परिश्रमी किसान बंजर भूमि को जोत कर उसे उपजाऊ बनाता है और फिर फसल उगाता है।

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